दिल्ली में रमज़ान के महीने में शराबबंदी की मांग को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुस्लिम समुदाय के कुछ संगठनों ने मांग की है कि जिस तरह सावन में कई जगहों पर चिकन की बिक्री पर रोक लगाई जाती है और लोग पूरे सावन मांसाहार से परहेज करते हैं, उसी तरह रमज़ान के पूरे महीने शराब की बिक्री पर भी रोक लगनी चाहिए। इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। इसी सवाल पर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख Chirag Paswan ने साफ और स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि खाने-पीने की चीजों को लेकर किसी पर पाबंदी लगाना सही नहीं है।
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चिराग पासवान ने कहा, “मैं खुद खाद्य एवं उपभोक्ता प्रसंस्करण मंत्री के नाते इस पर यही बोलूंगा कि खाने-पीने की चीजों पर व्यक्ति की अपनी पसंद होती है। खाने की चीजों की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए, किसी तरह की उसमें मिलावट नहीं होनी चाहिए — ये सब चीजों का हम ध्यान रखते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “जहां तक त्योहार के वक्त किसी चीज की बंदी की बात है, तो सबको स्वतंत्रता होती है कि क्या खाना है और क्या नहीं खाना है। किसी त्योहार या मौसम की वजह से इसकी बंदी करना — इसका समर्थन ना मैं करता हूं और ना ही हमारी पार्टी करती है।”
चिराग पासवान का यह बयान साफ संकेत देता है कि वे व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि सरकार की भूमिका गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने तक सीमित होनी चाहिए, न कि लोगों की निजी पसंद पर रोक लगाने तक। अब देखना होगा कि यह मुद्दा केवल मांग तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में इस पर और राजनीतिक बयानबाजी तेज होती है।