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...तो रद्द हो जायेगा विधानसभा चुनाव? कल सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई...

बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती देने वाली एक याचिका पर कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सरकार के लोकलुभावन घोषणाओं और महिलाओं को दस हजार रूपये ट्रांसफर किये जाने को चुनावी लाभ बताया गया है और...

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...तो रद्द हो जायेगा विधानसभा चुनाव? कल सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई...- फोटो : Darsh NEWS

नई दिल्ली: बिहार में अक्टूबर नवंबर महीने में विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ जिसमें अपनी अपनी जीत का दावा करने वाले राजद नेता तेजस्वी यादव और जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर समेत विपक्ष के सभी नेताओं को मुंह की खानी पड़ी। विधानसभा चुनाव में NDA ने प्रचंड जीत हासिल की और नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार का भी गठन हो गया। अब विधानसभा चुनाव को रद्द कर दुबारा चुनाव करवाने की मांग सुप्रीम कोर्ट पहुंची है जिस पर कल सुनवाई होगी।

जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर चुनाव रद्द कर दुबारा चुनाव करवाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची है जहां कल सुनवाई होगी। इस याचिका को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकान्त की बेंच में लिस्ट की गई है। याचिका में चुनाव के दौरान महिलाओं को 10-10 हजार रूपये ट्रांसफर किये जाने के NDA सरकार के फैसले को गैरकानूनी और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया गया है। प्रशांत किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में अब इस आधार पर बिहार चुनाव रद्द का दुबारा चुनाव करवाए जाने की मांग की है।

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जन सुराज ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम सेक्शन 123 के तहत चुनाव आयोग को धारा 324 से प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाये। याचिका पर अब कल सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में याचिका पर सुनवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता आदित्य सिंह इस मामले में जन सुराज का पक्ष रखेंगे। उन्होंने तर्क दिया है कि बिहार सरकार ने मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होने के बाद 6 अक्टूबर 2025 को और उसके बाद भी सत्ता की शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है।

सरकार ने फ्री एंड फेयर इलेक्शन के सिद्धांतों के खिलाफ जाते हुए मतदाताओं के खाते में पैसे भेज कर लाभ पहुँचाया। चुनाव आयोग ने इसे लेकर कोई कार्रवाई नहीं की। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि चुनाव के संभावित एलान के छः माह के पहले सत्ताधारी दलों के द्वारा लोकलुभावन योजनाओं पर रोक लगाया जाना चाहिए। साथ ही चुनावी लाभ लेने के लिए इसे सरकार की पूर्व नियोजित योजना के तहत गलत तरीके से मतदाताओं को प्रभावित कर वोट हासिल करने का भी आरोप लगाया गया है।

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