शेखपुरा: बिहार के किसानों के लिए मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना किसी संजीवनी से काम नहीं है। एक वक्त था जब किसानों को खेती के लिए बारिश की पानी पर निर्भरता होने के कारण एक फसल लेना मुश्किल हो रहा था लेकिन अब किसान निजी नलकूप से बारह महीने परंपरागत खेती के साथ व्यवसायिक खेती कर आर्थिक रुप से प्रगति कर रहे हैं।
आर्थिक तरक्की से आत्मनिर्भर हो रहे किसान
अमरपुर गांव की रहने वाले युवा किसान राहुल बताते हैं कि पहले अरियरी और चेवाड़ा प्रखंड के किसान नलकूपों के अभाव में पूरी तरह बारिश और परम्परागत जलस्रोतों पर निर्भर थे। कम बारिश और बोरिंग न होने से गेहूं, मक्का व सरसों की फसलें लग ही नहीं पाती थीं। लेकिन मुख्यमंत्री के 'सात निश्चय पार्ट-2' के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना’ ने किसानों को नई उम्मीद दी। इस योजना से किसानों को खेत में बोरिंग लगाने के लिए सरकारी आर्थिक सहायता मिलने लगी, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली। बड़ी संख्या में किसानों ने योजना का लाभ उठाकर निजी नलकूप लगाए और अब रवि फसल में उन्नत बीजों से गेहूं, सरसों व मक्का की भरपूर पैदावार कर संपन्न हो रहे हैं।
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वहीं किसान मुकेश कुमार बताते हैं कि मुख्यमंत्री की यह निजी नलकूप योजना अरियरी व चेवाड़ा प्रखंड के किसानों के लिए वरदान से कम नहीं है। उन्होंने बताया, "सरकार द्वारा किसानों के लिए शुरू की गई यह योजना बेहद सफल रही है, जिससे खेती आसान हो गई। अब हम अपने खेतों में 200 फुट से अधिक गहरी बोरिंग कराकर खुशहाल जीवन जी रहे हैं।
नलकूप योजना में जबरदस्त सफलता
लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता ई. आलोक प्रसाद ने बताया कि वित्तीय वर्ष में कुल 1966 आवेदन प्राप्त हुए। विभाग ने 1821 किसानों को बोरिंग के लिए स्वीकृति प्रदान की, जबकि 1591 किसानों के खाते में निजी नलकूप के लिए राशि हस्तांतरित की गई। उन्होंने कहा, "अरियरी प्रखंड में पानी की भारी कमी थी, जहां बोरिंग लगाना मुश्किल था। इसलिए प्राथमिकता के आधार पर वहां के किसानों को योजना का लाभ दिया गया।
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