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गंभीर आपराधिक मामले में बिहार के माननीय पहले नंबर पर, प्रदेश के 41 सांसदों पर आपराधिक मामले

देश के लगभग 40 प्रतिशत मौजूदा सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से 25 प्रतिशत के खिलाफ हत्या, अपहरण जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं. ये जानकारी एडीआर ने दी है. एडीआर ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा के प्रत्येक सांसद की संपत्ति का औसत मूल्य 38.33 करोड़ रुपये है. 53 सांसद (सात प्रतिशत) अरबपति हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईडब्ल्यू) ने लोकसभा और राज्यसभा की 776 सीटों में से 763 मौजूदा सांसदों की ओर से दिए गए शपथ पत्रों का विश्लेषण किया है.

यह आंकड़ा सांसदों की ओर से पिछले चुनाव और उसके बाद हुए किसी उप-चुनाव में लड़ने से पहले दायर किए गए हलफनामों से निकाला है. इसके मुताबिक, विश्लेषण किए गए 763 मौजूदा सांसदों में से 306 (40 प्रतिशत) मौजूदा सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है. 194 (25 प्रतिशत) मौजूदा सांसदों ने उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले होने की जानकारी दी है, जिनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध आदि से संबंधित मामले शामिल हैं.

बिहार के 41 सांसदों के खिलाफ क्रिमिनल केस

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, शपथ पत्रों की जांच में दोनों सदनों के सदस्यों में सबसे ज्यादा आपराधिक मामले (प्रतिशत में) केरल के सांसदों पर पाए गए हैं. केरल के 29 सांसदों में से 23 सांसदों (79 प्रतिशत) दागी पाए गए हैं. वहीं दूसरे नंबर पर बिहार है. बिहार के 56 सांसदों में से 41 माननीयों पर (73 प्रतिशत) क्रिमिनल केस है. वहीं महाराष्ट्र के 65 सांसदों में से 37 सांसदों (57 प्रतिशत), तेलंगाना के 24 सांसदों में से 13 (54 प्रतिशत) दिल्ली के 10 सांसदों में से पांच (50 प्रतिशत) ने अपने शपथपत्रों में उनके खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं.

गंभीर आपराधिक मामले में बिहार के माननीय पहले नंबर पर

वहीं गंभीर आपराधिक मामले में बिहार के माननीय पहले नंबर पर है.  एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों सदनों के सदस्यों में बिहार के 56 सांसदों में से लगभग 28 माननीय (50 प्रतिशत) दागी हैं. तेलंगाना के 24 सांसदों में से नौ (38 प्रतिशत), केरल के 29 सांसदों में से 10 (34 प्रतिशत), महाराष्ट्र के 65 सांसदों में से 22 (34 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश से 108 सांसदों में से 37 (34 प्रतिशत) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इन माननीय सांसदों ने चुनाव लड़ने से पहले दाखिल किए गए शपथपत्रों में अपने गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है.