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रमेश बिधूड़ी के बयान पर विवाद के बीच निशिकांत दुबे का आरोप, पीएम मोदी को 'नीच' कहते रहे दानिश अली

संसद में बसपा सांसद को गालियां देने और अपशब्द कहने का मामला शांत होता नजर नहीं आ रहा है. लोकसभा में भाजपा के सांसद रमेश बिधूड़ी के अपशब्द कहने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ ने उनके इस बयान के लिए सांसदों से माफी मांगी थी. हालांकि अब भाजपा बसपा सांसद पर हमला करती नजर आ रही है. भाजपा के गोड्डा झारखंड से सांसद निशिकांत दुबे ने शनिवार को कहा कि उनके साथी पार्टी सांसद को उकसाया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सांसद दानिश अली पीएम मोदी को 'नीच' कह रहे थे. दुबे ने कहा कि जैसा कि मुस्लिम सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'नीच' कहते रहे. उन्होंने कहा कि उनकी (बिधूड़ी) ओर इस्तेमाल किए गए शब्द स्वीकार्य नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि जब यह सब हुआ तब मैं संसद में मौजूद था. बसपा सांसद दानिश अली पीएम मोदी को 'नीच' कहते रहे...अगर आप प्रधानमंत्री जी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करके किसी को भड़काएंगे तो निश्चित रूप से ऐसी प्रतिक्रिया आएगी. भाजपा सांसद ने बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को इस संबंध में एक पत्र लिखा है. जिसमें उन्होंने उस दिन सदन में हुई घटनाओं की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि मैंने लोकसभा अध्यक्ष से दूसरे सांसद को भड़काने वाले सांसदों की जांच करने की मांग की है.

उन्होंने कहा कि मैंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा है जिसमें दानिश अली की टिप्पणी और उस दिन चर्चा के दौरान विभिन्न सदस्यों द्वारा दिए गए बयानों की जांच के लिए एक जांच समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है. उन्होंने कहा कि सांसदों को उकसाने में सौगत रॉय के भाषण भी शामिल हैं. उन्होंने सौगत राय का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में अपने भाषण के दौरान भगवार राम के अस्तित्व पर सवाल उठाये.

भाजपा सांसद ने सपा सांसद पर आदतन अपराधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि दुबे ने कहा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि दानिश अली जैसे लोग और कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी के कुछ नेता आदतन अपराधी हैं. वे भाजपा सांसदों को उकसाने के लिए अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं.

अपने पत्र में दुबे ने कहा है कि जब श्री दानिश अली अपनी असंयमित टिप्पणियों से बिधूड़ी को उकसाने में व्यस्त थे, तो उन्होंने हमारे माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की. दुबे ने कहा कि दानिश अली बिना माइक्रोफोन के पूरे गलियारे में चिल्लाते रहे, लेकिन उन्हें यह कहते हुए स्पष्ट रूप से सुना जा सकता था कि 'नीच को नीच नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे'.

उन्होंने कहा है कि किसी भी देशभक्त जन प्रतिनिधि के लिए यह काफी है कि वह अपना धैर्य खो दे और अप्रिय शब्द बोलकर उसके जाल में फंस जाए. दुबे ने कहा कि अगर बिधूड़ी ने अनुचित कार्य किया है, तो, मेरे विचार से, दानिश अली सहित अन्य माननीय सदस्यों ने भी समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाने में योगदान दिया है. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में कहा है कि 'विशेषाधिकार के उल्लंघन' का पहलू, जिसे दानिश अली और संसद के कुछ अन्य सदस्य जोर-शोर से उद्धृत कर रहे हैं, एकतरफा रास्ता नहीं हो सकता है. इसलिए, मैं आपसे उक्त चर्चा के दौरान विभिन्न सदस्यों द्वारा दिए गए बयानों की जांच करने के लिए एक 'जांच समिति' गठित करने का अनुरोध करता हूं.

हालांकि, भाजपा सांसद ने लोकसभा में की गई अपनी पार्टी के सदस्यों की टिप्पणियों की निंदा की है. उन्होंने कहा कि यह हमारे 'लोकतंत्र के मंदिर' के प्रति गहरा सम्मान और आपके द्वारा संसद की गरिमा को बनाए रखने का एक सराहनीय प्रदर्शन है कि बिधूड़ी की ओर से कहे गए अशोभनीय शब्दों को तुरंत सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया. मैं अन्य समान विचारधारा वाले संसद सदस्यों के साथ आपकी त्वरित कार्रवाई के लिए आपको बधाई देता हूं.