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...जब नेपाल में विनाशकारी भूकंप से मची थी तबाही, 9 हजार मौतों से कांप उठी थी धरती

नेपाल में एक बार फिर से विनाशकारी भूकंप आया है. नेपाल में शुक्रवार की रात को आए शक्तिशाली भूकंप ने दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत को हिलाकर रख दिया. नेपाल में तबाही मचाने वाले भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसका असर दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में देखा गया. 6.4 तीव्रता वाले इस भूकंप के कारण कई इमारतें ढह गई हैं. बिहार के पटना और मध्य प्रदेश के भोपाल तक भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. दिल्ली-NCR में भूकंप के झटकों के बाद लोग अपने-अपने घरों के बाहर निकल आए. गनीमत है कि फिलहाल किसी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. 

आपदा को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने भूकंप से हुई मानवीय और भौतिक क्षति पर दुख व्यक्त किया है. नेपाल पीएमओ ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि माननीय प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल जी ने शुक्रवार रात 11:47 पर जजरकोट के रामीडांडा में आए भूकंप से हुई मानवीय और भौतिक क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया है और घायलों तत्काल बचाव और राहत के लिए सभी 3 सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया है.

भूकंप का केंद्र नेपाल के जजरकोट का लामिडांडा इलाका था. देर रात धरती इस कदर कांपी है कि न केवल इमारतें बल्कि कई लोग जमींदोज हो चुके हैं. इस भूकंप के चलते जजरकोट में भारी नुकसान हुआ है. नेपाल में शुक्रवार आधी रात से ठीक पहले उत्तर-पश्चिमी नेपाल के जिलों में जोरदार भूकंप आने से कम से कम 129 लोग मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हो गए, जबकि बचाव दल पहाड़ी गांवों में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं. इस विनाशकारी भूकंप में कई घर और इमारतें ढह गईं. मलबे में दबने के कारण कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. माना जा रहा है कि नेपाल भूकंप में मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है. 

पिछले महीने की 22 अक्टूबर को आए भूकंप का केंद्र भी नेपाल ही था. नेपाल में भूकंप के 4 झटके लगे थे. सुबह 7:39 मिनट पर भूकम्प का पहला झटका लगा. जिसकी तीव्रता रेक्टर स्केल पर 6.1 मापी गई है. इसके बाद भूकंप का दूसरा झटका 4.2 तीव्रता का 8:08 मिनट आया. भूकम्प का तीसरा झटका सुबह 8:28 मिनट पर महसूस किया गया, तीव्रता 4.3 रही. इसके बाद 8:59 मिनट पर चौथी बार भूकंप का झटका महसूस किया गया था.

लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है जब नेपाल में भूकंप ने तबाही मचाई हो. नेपाल में पिछले एक महीने में तीन बार भूकंप आया है और इससे पहले भी कई बार नेपाल में जब-जब भूकंप आता है, इसका असर दिल्ली-NCR और पूरे उत्तर भारत पर जरूर पड़ता है. नेपाल में आए इस भयंकर भूकंप ने एक बार फिर से 2015 के विनाशकारी भूकंप की याद दिला दी है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था.

दरअसल, शुक्रवार रात को आए भूकंप के बाद से एक बार साल 2015 में 25 अप्रैल के विनाशकारी भूकंप की याद ताजा हो गई है, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे. 25 अप्रैल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप को गोरखा नाम दिया गया था, जिसमें करीब 9000 लोगों की मौत हुई थी और 22 हजार लोग घायल हो गए थे. 25 अप्रैल, 2015 को मध्य नेपाल में काठमांडू शहर के पास यह भूकंप आया था. साल 2015 में नेपाल में आए भूकंप का असर भारत, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के कुछ इलाकों में भी महसूस किए गए थे. कहा जाता है कि नेपाल में 1934 के बाद से आया यह सबसे भीषण भूकंप था, जब इतनी ही तीव्रता के भूकंप में 17 हजार लोग मारे गए थे.

नेपाल में कई बार डोली थी धरती

नेपाल में आए उस भूकंप की त्रासदी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हजारों नेपाली एक झटके में बेघर हो गए थे. नेपाल में आए उस भूकंप में कई परिवार जमींदोज हो गए थे और कई दिनों तक लोग मलबों में अपनों की तलाश करते रहे. नेपाल में 2015 के भूकंप में बार-बार धरती डोलती रही थी. इस भूकंप से पूरी दुनिया सदमे में चली गई थी. नेपाल में चारों ओर चीख-पुकार मची हुई थी और जब भी झटके आते थे लोग घरों से भागने लगते थे. आलम तो यह था कि लोग कई दिनों तक अपने घरों में भी नहीं गए.

कितनी तीव्रता का आया था भूकंप

वीकीपीडिया के मुताबिक, 2015 में आए भूकंप में सबसे पहला झटका 7.8 की तीव्रता वाला था, जिसका इसका एपिसेंटर लामजंग से करीब 34 किमी पूर्व-दक्षिण पूर्व और काठमांडू से 77 किमी उत्तर-पश्चिम में था. इसकी गहराई करीब 15 किमी थी. इसके बाद 6.6 और 6.7 तीव्रता के दो बड़े झटकों ने मुख्य भूकंप को पूरी तरह से हिला दिया था. इतना ही नहीं, एक महीने बाद फिर मई में भी नेपाल में भूकंप आया था, जिसमें करीब 100 लोगों की मौत हुई थी. कहा जाता है कि नेपाल में आए इस भूकंप की वजह से सरकार को करोड़ों रुपए का भी नुकसान हुआ था.

आखिर नेपाल में बार-बार भूकंप क्यों आता है? 

दरअसल, नेपाल दुनिया के उस खतरनाक जोन में है, जिसे सबसे ज्यादा एक्टिव टेक्टोनिक जोन कहा जाता है. इस हिस्से में कई बार भूकंपीय गतिविधि रिकॉर्ड की जा चुकी है. यही वजह है कि यह भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए सबसे ज्यादा खतरे वाला क्षेत्र है. नेपाल में समय-समय पर हालात बिगड़ने पर अलर्ट जारी किया जाता और कई रिपोर्ट में इसे रिस्क जोन बताया जा चुका है.

नेपाल के 22 जिले रिस्क जोन में

आईआईटी कानपुर की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के 22 जिले भूकंप के सबसे ज्यादा रिस्क जोन में हैं. इसमें बझांग जिला भी शामिल है. नेपाल के इस जिले के आसपास वाले इलाके में खतरे की घंटी बनी रहती है. भूगर्भ विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार ऐसा हुआ है कि यहां आए भूकंप का असर उत्तर भारत तक महसूस किया गया है. हालांकि, अब तक कोई बड़ा असर नहीं नजर आया है. किसी तरह की क्षति नहीं देखी गई है, लेकिन भौगोलिक परिस्थिति के हिसाब से उत्तर भारत वहां आने वाले भूकंप से अछूता नहीं रहा है.