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जंग की लपटें रसोई तक: गैस सिलेंडर के लिए कतारों में खड़ा देश, होटल-रेस्टोरेंट से लेकर उद्योग तक गहरा संकट

पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हैं, वहीँ होटल-रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित है।

Flames of war reach the kitchen
जंग की लपटें रसोई तक: गैस सिलेंडर के लिए कतारों में खड़ा देश, होटल-रेस्टोरेंट से लेकर उद्योग तक गहर- फोटो : Darsh NEWS

दूर कहीं पश्चिम एशिया में चल रही जंग की आग अब धीरे-धीरे आम लोगों की रसोई तक पहुंचती महसूस हो रही है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि जिस एलपीजी गैस सिलेंडर को पहले एक फोन कॉल पर घर तक पहुंचा दिया जाता था, उसी सिलेंडर के लिए अब लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत में एलपीजी आपूर्ति पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। कई जगहों से गैस सिलेंडर की कमी और चोरी की घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के डेढ़ पसार गांव में एक पिता अपनी बेटी की शादी से पहले गैस सिलेंडर के लिए सुबह से रात तक एजेंसी पर लाइन में लगा रहा, लेकिन उसे सिलेंडर नहीं मिल सका। आखिरकार शादी के लिए मिठाइयां लकड़ी के चूल्हे पर बनानी पड़ीं। 

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इस संकट का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। पटना में व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कमी के कारण होटल, रेस्टोरेंट, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और स्टील फैब्रिकेशन जैसे कई उद्योगों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कारोबारियों का कहना है कि प्रतिदिन 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार प्रभावित हो रहा है।पटना सिटी और फतुहा के औद्योगिक क्षेत्रों में स्टील फैब्रिकेशन उद्योग को खास तौर पर झटका लगा है। इस उद्योग का सालाना कारोबार लगभग पांच हजार करोड़ रुपये का बताया जाता है। उद्योग संगठनों के अनुसार पाइप से मिलने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में भी करीब 20 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिससे उत्पादन क्षमता घटकर लगभग 80 प्रतिशत रह गई है।

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होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। कई जगहों पर जहां रोजाना 20 व्यावसायिक सिलेंडर की जरूरत होती है, वहां मुश्किल से 10 सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं। दूसरी ओर, स्टील अलमीरा बनाने वाले क्लस्टर में रोजाना करीब एक हजार अलमीरा तैयार तो हो रहे हैं, लेकिन गैस की कमी के कारण उनकी फिनिशिंग नहीं हो पा रही है। इससे प्रतिदिन लगभग एक करोड़ रुपये का तैयार माल स्टॉक में जमा हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन लागत बढ़ेगी और इसका असर बाजार में सामान की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल लोग और उद्योग दोनों इस उम्मीद में हैं कि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य हो और रोजमर्रा की जिंदगी पटरी पर लौट सके।


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