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किसानों के लिए अच्छी खबर, दूध उत्पादन करने पर नहीं सहना पड़ेगा घाटा

बिहार सरकार किसानों पर मेहरबान बनी हुई है. इस बीच किसानों के लिए अच्छी खबर है. पशुपालकों के हित में बिहार सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है. दरअसल, गर्मी के दिनों में दूध का उत्पादन घटने के बावजूद पशुपालकों को घाटा नहीं होगा. दूध उत्पादन घटने पर होने वाले घाटे की भरपाई सरकार करेगी. इसके लिए सरकार ने उन्हें सब्सिडी देने की योजना बनाई है. किसानों को इसका उचित लाभ मिले इसके लिए प्रति लीटर रेट भी तय कर लिया गया है.

3 रुपये प्रति लीटर मिलेगा अनुदान 

जानकारी के मुताबिक, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने पशुपालकों को प्रति लीटर 3 रुपये अनुदान देने का निर्णय लिया है. यह उन पशुपालकों को मिलेगा, जिन्होंने दुग्ध सहकारी समिति के जरिए दूध बेचा है. वर्ष 2023 में अप्रैल से जून के बीच दूध बेचने वाले पशुपालकों के लिए विभाग ने करीब दस करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं. इससे गर्मी के महीनों में सहकारी दुग्ध समितियों में दूध की आपूर्ति करने वाले पशुपालकों को अनुदान दिया जाएगा.

सीधे खाते में होगा भुगतान  

काम्फेड के अधीन विभिन्न दुग्ध संघों, डेयरी इकाइयों द्वारा दुग्ध सहकारी समितियों के जरिए दूध संग्रह किया जाता है. समितियों के जरिए ही अनुदान राशि पशुपालकों को मिलेगी. पशुपालकों को अप्रैल से जून के बीच 91 दिनों का भुगतान किया जाना है. इस दौरान समितियों के जरिए औसतन प्रतिदिन 3.66 लाख लीटर दूध की आपूर्ति हुई है. इस पर 3 रुपये प्रति लीटर की दर से अधिक भुगतान करने पर नौ करोड़ 99 लाख 99 हजार रुपये खर्च होंगे. पशुपालकों को अनुदान का भुगतान डीबीटी के तहत उनके खाते में किया जाएगा. राज्य में अभी 8 दुग्ध संघ हैं. इनसे करीब 27 हजार दुग्ध समितियां जुड़ी हुई हैं.

तो इसलिए लिया अनुदान का फैसला...

दरअसल, गर्मी के दिनों में तापमान बढ़ने के बाद हरे चारे की कमी हो जाती है. इससे दुधारू पशुओं को खिलाने में राशन पर होने वाला खर्च बढ़ जाता है. हरे चारे की कमी के चलते दूध उत्पादन भी घट जाता है. इस तरह पशुपालकों पर दोहरी मार पड़ती है. आय कम हो जाती है और खर्च बढ़ जाता है. जिसके बाद यह फैसला लिया गया है. दरअसल, अनुदान से ही इसकी भरपाई की जाएगी. वहीं, सरकार के इस फैसले से पशुपालकों को को बड़ी मदद मिलेगी.