योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहा जाता है। इस बार सूर्य 14 और 15 मार्च की आधी रात के आसपास कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी कारण अलग-अलग पंचांग में मीन संक्रांति की तारीख को लेकर थोड़ा अंतर बताया जा रहा है। कुछ लोग 14 मार्च को संक्रांति मानेंगे, जबकि कुछ जगह 15 मार्च को यह पर्व मनाया जाएगा।
सूर्य पूरे साल में सभी 12 राशियों में प्रवेश करते हैं, इसलिए साल में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं। मीन संक्रांति के दिन कई लोग पवित्र नदी या जल में स्नान करते हैं और सूर्य देव की पूजा करते हैं। इस दिन दान करना भी शुभ माना जाता है।
मीन संक्रांति के साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाती है। यह अवधि करीब 14 अप्रैल की सुबह तक रहेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और यज्ञोपवीत जैसे बड़े मांगलिक काम नहीं किए जाते। लोग इन शुभ कार्यों को खरमास खत्म होने के बाद ही करना पसंद करते हैं।
मीन संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और उगते सूर्य को जल चढ़ाना शुभ माना जाता है। तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें कुमकुम, चावल और लाल फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना अच्छा माना जाता है। साथ ही जरूरतमंद लोगों को अनाज, कपड़े या धन का दान करना भी पुण्य का काम माना जाता है।
इस बार मीन राशि में सूर्य के आने से खास ग्रह योग भी बनेगा। पहले से ही इस राशि में शुक्र और शनि मौजूद हैं। ऐसे में तीन ग्रहों का यह संयोग कुछ लोगों के जीवन में रिश्तों और कामकाज से जुड़े नए बदलाव भी ला सकता है।