केके पाठक को लेकर बिहार विधानसभा में घमासान कम होने का नाम नहीं ले रहा है जहां मुख्यमंत्री के सदन में दिए बयान का अपमान ना अधिकारी कर रहा है इसको लेकर विपक्ष सरकार को गिरने में लगी है भाकपा माले विधायक संदीप सौरभ ने कहां किया बड़ा सवाल है कि क पाठक बड़े हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बड़े हैं नीतीश कुमार ने जब सदन में ऐलान किया कि 10 से 4:00 बजे स्कूल चलेंगे और शिक्षकों को 15 मिनट पहले आना होगा उसके बाद भी की के पाठक मुख्यमंत्री के बाद को नहीं मानते हैं तीन दिन हो जाने के बाद भी भोजपुरी के कोईलवर में शिक्षकों का वेतन इसलिए काट लिया जाता है कि वह 9.5 में स्कूल में नहीं आते हैं भाजपा जदयू की सरकार में अधिकारी की तानाशाही देखने को मिल रही है मुख्यमंत्री जब सदन में निर्देश देने के बावजूद उनकी बात नहीं मानी जाती है सदन में मुख्यमंत्री का बयान सदन की संपत्ति होती है और उसकी अवहेलना अधिकारी करता है तो यह बहुत बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है हमने सदन में सवाल सरकार से पूछा था कि क्या किसी भी बैठक में अधिकारी किसी के ऊपर गाली-गलौज कर सकता है या किसने अधिकार दे दिया है इसका मतलब साफ है कि कम सक्षम नहीं है अधिकारी पर रोक लगाने के लिए