पटना: स्वर्गीय कामेश्वर चौपाल की प्रथम पुण्यतिथि पर राजनीतिक गलियारे के दिग्गज नेताओं ने उनके तेल चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम पटना के बेऊर स्थित उनके आवास पर आयोजित किया गया। कामेश्वर चौपाल का जन्म 24 अप्रैल 1956 को बिहार के सुपौल जिले के मरौना प्रखंड के कमरैल गांव में हुआ था। उन्हें खास पहचान 9 नवंबर 1989 को अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास की पहली ईंट रखने के बाद मिली। एक दलित होने के बावजूद इस मौके पर उन्हें यह सम्मान मिला, जो सामाजिक समरसता और हिंदू एकता का प्रतीक माना गया। इस उपलब्धि के बाद वे "पहले कारसेवक" के नाम से प्रसिद्ध हुए और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।
कामेश्वर चौपाल ने अपने जीवन में "रोटी के साथ राम" का नारा दिया, जो समाज में एकता और धार्मिक आस्था का प्रतीक बना। राम मंदिर आंदोलन के बाद वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए। लंबी बीमारी के बाद उनकी मृत्यु 6 फरवरी 2025 को सर गंगाराम अस्पताल में हुई। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया था।
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श्रद्धांजलि सभा में समाज कल्याण मंत्री और पूर्व बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, विधायक संजीव चौरसिया, फुलवारी विधायक श्याम रजक, मधुबनी विधायक माधव आनंद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अनामिका पासवान सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि कामेश्वर चौपाल का जीवन सामाजिक समरसता, धार्मिक आस्था और निष्ठा का प्रेरणादायक उदाहरण है। कामेश्वर चौपाल ने अपने साहस, समर्पण और दृढ़ संकल्प से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दिया, जिसे आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।