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मॉनसून ने दिया बिहार को तगड़ा झटका, 48 फीसदी कम बारिश ने धान किसानों की बढ़ाई मुश्किलें

बिहार में इस मानसून सीजन में अब तक 48 फीसदी कम बारिश हुई है. यह देश के किसी भी राज्य में हुई दूसरी सबसे कम बारिश है. इस बार देश में कुल मिलाकर सामान्य से 5 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है. चार महीने के मानसून सीजन ने सोमवार को आधी यात्रा पूरी कर ली. केवल मणिपुर में 50 फीसदी से कम बारिश दर्ज की गई. कम बरसात को लेकर मणिपुर अभी टॉप पर है तो दूसरे नंबर बिहार है. कम बारिश के चलते किसानों की मुश्किल बढ़ी हुई है. खास तौर से धान की खेती प्रभावित हुई है.

किसी जिले में नहीं हुई ज्यादा बारिश

इस मॉनसून सीजन में बिहार के किसी भी जिले में अतिरिक्त बारिश दर्ज नहीं हुई है. संयोग से, उत्तर बिहार के आठ में से सात जिलों में कम बारिश हुई, यहां बरसात में कमी का आंकड़ा 60 फीसदी या उससे भी ज्यादा की रहा। पटना में बारिश की कमी 55 फीसदी रही. राज्य में सीतामढ़ी जिला ऐसा रहा जहां 82 फीसदी कम बारिश हुई है.

इस महीने ज्यादा बारिश के आसार

पटना मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक आशीष कुमार ने टीओआई को बताया कि आईएमडी ने पहले ही जुलाई में बिहार में सामान्य से कम बारिश की भविष्यवाणी की थी. उन्होंने कहा कि मानसून ट्रफ लाइन की दक्षिण की ओर स्थिति के कारण उत्तर बिहार में भी बारिश कम हुई है. यह बेहतर हो सकता था कि अगर ट्रफ लाइन हिमालय की तलहटी की ओर होती. राज्य में कम बारिश ने धान किसानों को मुसीबत में डाल दिया है.

किसान क्यों हैं परेशान

बिहार में कम बारिश के चलते धान किसानों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं. सूत्रों के अनुसार, राज्य में कुल धान रोपनी की स्थिति लगभग 50 फीसदी ही है, यहां तक कि बुआई का अहम फेज एक पखवाड़े में समाप्त हो जाएगा. हालांकि, कृषि विभाग के संयुक्त सचिव अनिल कुमार झा ने दावा किया कि अगस्त में मानसून की बारिश फिर से शुरू होने का पूर्वानुमान है. ऐसे में धान रोपनी की प्रक्रिया फिर शुरू हो सकती है. हालांकि, उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि अगले 15-20 दिनों में बारिश की कमी रहने पर स्थिति गंभीर हो सकती है.

अगस्त में कैसा रहेगा मॉनसून IMD ने बताया

हालांकि, आईएमडी ने 6 अगस्त तक बिहार में जोरदार बारिश का अनुमान जताया है. सोमवार तक, मानसून ट्रफ लाइन का पश्चिमी छोर हिमालय की तलहटी के करीब चल रहा था और इसका पूर्वी छोर दरभंगा, देवघर और बंगाल की उत्तरी खाड़ी से होकर गुजर रहा था. आशीष ने कहा, ट्रफ लाइन की अनुकूल स्थिति के अलावा, बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र भी बना है, जिसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और इलाके में बारिश होने की संभावना है.