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मुस्कान ने बिना कोचिंग, सिर्फ मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर UPSC 2025 में सफलता की नई मिसाल लिख दी है …. जरूर पढ़ें

छोटे गांव की बड़ी उड़ान, सीमित साधनों में बड़ा सपना। सादोपुर की बेटी मुस्कान वर्मा ने बिना कोचिंग, सिर्फ मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर UPSC 2025 में सफलता की नई मिसाल कायम कर दी।

Muskan has set a new example of success in UPSC 2025
मुस्कान ने बिना कोचिंग, सिर्फ मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर UPSC 2025 में सफलता की नई मिसाल लिख दी ह- फोटो : Darsh News

कभी-कभी सपनों की उड़ान किसी बड़े शहर की कोचिंग से नहीं, बल्कि छोटे गांव के शांत कमरों से शुरू होती है।

जहां संसाधन सीमित होते हैं, लेकिन हौसले आसमान से भी ऊंचे होते हैं।

ऐसी ही एक प्रेरक कहानी ग्रेटर नोएडा के सादोपुर गांव की बेटी मुस्कान वर्मा ने लिखी है, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के सेल्फ स्टडी के दम पर UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 771 हासिल कर ली।


मुस्कान ने ग्रेजुएशन के बाद UPSC की तैयारी शुरू की। हालांकि महंगी कोचिंग फीस उनके लिए संभव नहीं थी, इसलिए उन्होंने शुरुआत से ही सेल्फ स्टडी को अपना रास्ता बनाया। उन्होंने सबसे पहले NCERT की किताबों से अपने बेसिक्स मजबूत किए और फिर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से जरूरी स्टडी मटेरियल जुटाया। आज डिजिटल युग में उपलब्ध मुफ्त संसाधनों का उन्होंने भरपूर फायदा उठाया।


तैयारी के दौरान मुस्कान की दिनचर्या बेहद अनुशासित रही। शुरुआत में वे रोज करीब 8 घंटे पढ़ाई करती थीं, लेकिन प्रीलिम्स पास करने के बाद मेन्स की तैयारी के दौरान यह समय बढ़कर 10 से 12 घंटे तक पहुंच गया। उनका मानना है कि UPSC में सफलता के लिए लगातार पढ़ाई और नियमित रिवीजन सबसे जरूरी होता है। उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाई, लेकिन यूट्यूब के लेक्चर्स और ऑनलाइन टेस्ट सीरीज से पढ़ाई को मजबूत किया।


प्रीलिम्स के लिए मुस्कान ने स्टैटिक विषयों पर फोकस और नियमित प्रैक्टिस को अपनी रणनीति बनाया। वहीं मेन्स परीक्षा के लिए उन्होंने आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर खास ध्यान दिया। इंटरव्यू की तैयारी उन्होंने दोस्तों के साथ मॉक इंटरव्यू लेकर की, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।


मुस्कान के लिए यह सफलता आसान नहीं थी। 2023 और 2024 में उनके पहले दो प्रयास असफल रहे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और बेहतर रणनीति के साथ 2025 में उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू तीनों चरण पार कर लिए।


मुस्कान वर्मा की कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि यह विश्वास जगाने की कहानी है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते। आज जब कोचिंग को सफलता का एकमात्र रास्ता माना जाता है, तब मुस्कान की सफलता यह संदेश देती है कि सही दिशा में मेहनत, अनुशासन और धैर्य हो तो सपनों की मंजिल खुद रास्ता बना लेती है।

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