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जो खुद कठघरे में वह..., पटना हॉस्टल में छात्रा की मौत का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, क्या होगा अब...

राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. SIT गठन के बाद भी लोग CBI जांच की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि जो पुलिस ने शुरुआत में जब लापरवाही बरती तो अब.., मामला अब हाई कोर्ट पहुंचा है जहां...

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जो खुद कठघरे में वह..., पटना हॉस्टल में छात्रा की मौत का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, क्या होगा अब...- फोटो : Darsh News

पटना: राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार फैलता जा रहा है। इस मामले में पुलिस जब सवालों के घेरे में खड़ी हो गई तो डीजीपी ने आनन फानन में एक SIT गठित कर दी जिसके आधार अपर अब वृहत स्तर पर छानबीन शुरू की गई है। अब यह मामला हाई कोर्ट भी पहुंच गया है।

पटना हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील मणिभूषण प्रताप सेंगर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इस संबंध में उन्होंने दर्श न्यूज़ से खास बातचीत करते हुए कहा कि अभी जो वीभत्स घटना घटी है उसकी CBI या निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में आवेदन दिया है। साथ ही मैंने आवेदन के माध्यम से पुलिस और अस्पताल के रोल की भी जांच की मांग की है। इसके साथ ही बिहार में हॉस्टल और लॉज के लिए एक नियम कानून बनाये जाने की भी मांग की है।

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वरिष्ठ वकील ने कहा कि इस आवेदन के पीछे हमारा मुख्य आधार अस्पताल के द्वारा अपना बयान बदलना और पुलिस प्रशासन के कठघरे में खड़ा होना है। जो खुद कठघरे में खड़ा है वह उसी मामले में किस आधार पर जांच करेगा। जब पुलिस की कार्यशैली ही संदिग्ध है तो वह पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच कैसे कर सकती है। जनता में विश्वास और न्यायसंगत जांच के लिए CBI या निष्पक्ष न्यायिक जांच की मैंने मांग की है।

उन्होंने कहा कि पुलिस की जो भूमिका सामने आई है उसके अनुसार अब SIT पर भी लोगों को भरोसा नहीं है। अगर पुलिस लापरवाही नहीं करती तो फिर यह मामला इतना तूल नहीं पकड़ता और अब जब पुलिस खुद ही सवालों के घेरे में है तो फिर पुलिस इस मामले की जांच निष्पक्ष कैसे कर सकती है। उन्होंने कहा कि पटना में सैकड़ों हॉस्टल है लेकिन बिहार सरकार के पास इसकी कोई जानकारी नहीं है। बिना नियम शर्तों के राजधानी में हॉस्टल चलाये जा रहे हैं। हॉस्टल संचालकों के लिए एक जवाबदेही तय होनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि कौन एक हॉस्टल संचालन के लायक है या नहीं है उसके बाद ही इन्हें लाइसेंस मिलना चाहिए।

उन्होंने इस मामले में संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि अगर इस मामले की तह तक निष्पक्ष जांच की जाये तो कई बड़ी मछलियाँ और सफेदपोश भी इसमें फंसेंगे। यह एक आम आदमी और एक कानूनविद होने के नाते मैं कह रहा हूं कि अगर इसकी निष्पक्ष जांच की जाये तो बहुत सारी बातें सामने आ सकती हैं।

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पटना से कुमार मनीष की रिपोर्ट


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