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आखिरकार झुक ही गई नीतीश सरकार, शिक्षकों की आवासीय ट्रेनिंग को किया रद्द

इस वक्त की बड़ी खबर सियासी गलियारे से सामने आ रही है. जहां नीतीश सरकार को आखिरकार झुकना ही पड़ा. दरअसल, शिक्षकों की आवासीय ट्रेनिंग को सरकार की ओर से रद्द करने का फैसला लिया गया है. आपको बता दें कि, 16 अक्टूबर से ही सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई थी. बीच में नवरात्र आ जाने की वजह से ट्रेनिंग को रद्द करने की मांग की गई. इसके साथ ही इस मांग को लेकर जमकर बवाल भी हुआ. इस मुद्दे ने सियासी रूप भी ले लिया. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की ओर से बिहार सरकार पर जमकर तंज भी कसा गया. जिसके बाद ट्रेनिंग के फैसले को वापस ले लिया गया.

शिक्षा विभाग ने जारी किया पत्र    

बता दें कि, इस पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया है. पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि, टराज्य के सभी स्तर के प्रशिक्षण जो दिनांक 16 अक्टूबर 2023 से 21 अक्टूबर, 2023 तक प्रशिक्षण संस्थानों में संचालित हैं निर्देशानुसार दिनांक 17 अक्टूबर, 2023 से अपरिहार्य कारणों से स्थगित किया जाता है. उक्त चरण के सभी प्रशिक्षों का प्रशिक्षणचर्या अधूरा माना जाएगा. इसको पूर्ण करने हेतु बाद में आदेश निर्गत किया जाएगा.

आवासीय ट्रेनिंग की तिथि 21 अक्टूबर तक थी. सुबह 5:30 बजे से शाम के 7 बजे तक आवासीय ट्रेनिंग दी जानी थी. आवासीय ट्रेनिंग विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों, बिपार्ड में दी जानी थी. शिक्षकों का कहना था कि आवासीय ट्रेनिंग के नाम पर हिंदू धर्म के शिक्षकों को परेशान किया जा रहा है. दुर्गा पूजा की छुट्टी स्कूलों में पहले से ही घोषित है और उसी दौरान आवासीय ट्रेनिंग का कार्यक्रम शिक्षा विभाग ने रखा है. जबकि हिंदू धर्म के शिक्षक उपवास पर रहकर पूजा पाठ करते हैं.

जल्द ही जारी होगा नया डेट

बता दें कि, शिक्षकों के आवासीय ट्रेनिंग को लेकर जल्द ही नई तिथि जारी कर दी जाएगी. शिक्षक संघ सरकार से आदेश को वापस लेने की मांग कर रहा था. कह सकते हैं कि, सीधे तौर पर बिहार सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि 48 घंटे में फैसला वापस नहीं लिया गया तो बड़ा आंदोलन होगा. जिसके बाद आवासीय ट्रेनिंग कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है. वहीं, इस ट्रेनिंग में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसी देनी है इसका प्रशिक्षण शिक्षकों को आवासीय ट्रेनिंग में दिया जाना दिया था. डिजिटल उपकरण व कंप्यूटर चलाना शिक्षकों को सिखाया जाना था ताकि शिक्षक बच्चों को बेहतर ढंग से पढ़ा सकें.