पटना सिविल कोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलने से राजधानी में दहशत का माहौल है। यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ दिनों में लगातार तीसरी बार ऐसी धमकी सामने आई है। खास बात यह है कि हर बार यह धमकी उस वक्त दी गई, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। इससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या यह महज संयोग है या फिर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा?
पप्पू यादव इस समय बेऊर जेल में बंद हैं। हाल ही में उन्हें 31 साल पुराने एक मामले में जमानत मिल चुकी है, लेकिन दूसरे केस में सुनवाई लंबित होने के कारण उन्हें फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसी बीच कोर्ट को बार-बार मिल रही धमकियों के कारण सुनवाई टलती जा रही है, जिससे न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो रही है बल्कि आम लोगों का भरोसा भी प्रभावित हो रहा है।
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ध्यान देने वाली बात यह है कि धमकी देने वाला व्यक्ति या गिरोह अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। यह स्थिति सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर राजधानी के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में स्थित अदालतें ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेगा? इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पप्पू यादव के सोशल मीडिया अकाउंट से किए गए पोस्ट में पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। समर्थकों का कहना है कि यह सब उन्हें परेशान करने और उनकी आवाज दबाने की कोशिश है, जबकि प्रशासन का दावा है कि कानून अपना काम कर रहा है।

फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि धमकी देने वालों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए और अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। न्यायिक प्रक्रिया का निर्बाध रूप से चलना लोकतंत्र की बुनियाद है। अगर इसे डर और धमकी के जरिए रोका जाएगा, तो यह पूरे सिस्टम के लिए खतरनाक संकेत है।