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यात्रियों ने बताई ट्रेन हादसे की कहानी, सोने के दौरान आई तेज आवाज और टूट पड़ा आफत का पहाड़

बिहार के बक्सर जिले के रघुनाथपुर में बड़ा ट्रेन हादसा हो गया. नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस ट्रेन की 6 बोगियां देखते ही देखते बेपटरी हो गई, जिसके बाद चीख-पुकार मच गई. लोग अपनी-अपनी जान बचाने के कड़ी मशक्कत में जुट गए. घटनास्थल पर गहमागहमी का माहौल कायम हो गया. लगातार राहत और बचाव कार्य जारी है. वहीं, इस घटना का असर अन्य ट्रेनों पर भी पड़ा. कई ट्रेनों के रूट बदल दिए गए हैं. वहीं, इस घटना को लेकर यात्रियों ने पूरे हादसे की कहानी बताई. 

एक यात्री ने बताया कि, बक्सर से ट्रेन ने करीब आधे घंटे की दूरी तय की होगी कि जोर की आवाज हुई. आवाज सुनतेही सभी यात्री सतर्क हो गये. दूसरे ही पल उन्होंने खुद को बोगी के अंदर गिरा पाया. एक अन्य यात्री ने बताया कि, ट्रेन से जोरदार आवाज हुई और कई डब्बे पलट गये. कुछ बेपटरी हो गये. इसे समझने का मौका भी नहीं मिला. सब ओर से चीख-पुकार की आवाज आने लगी. कई लोग डब्बे से बाहर निकलने की कोशिश रहे थे पर उनके दरवाजे लॉक हो गये थे. दरवाजे को वेधक्का देकर खोलनेकी कोशिश कर रहेथे. पर उसके नहीं खुलने पर उनकी बदहवाशी बढ़ती जा रही थी.

इस दौरान एक अन्य यात्री ने बताया कि, हादसे के दौरान वह सोये हुए थे. लेकिन, अचानक से जोरदार धमाके के जैसे आवाज आई. देखते ही देखते ट्रेन की 6 बोगियां बेपटरी हो गई और बड़ा हादसा हो गया. इस दौरान अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया. बोगियों में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. जो घायल हो गए. 

दूसरे यात्री ने यह भी बताया कि, वह इस दौरान वह ट्रेन में बैठे थे. लेकिन, अचानक हादसा हुआ और उनकी बोगी करीब 2 से 3 राउंड घूम गई. इस दौरान गेट ऊपर हो गया और लोग इधर-उधर बिखर गए. इस दौरान एक युवक की मौत भी हो गई. इस दौरान भारी भीड़ जुट गई थी. हालांकि, राहत कार्य के लिए पूरी टीम पहुंची थी, जिन्होंने उनकी मदद की.

इसके साथ ही बेगूसराय की एक महिला ने बताया कि, वह अपनी मां के साथ यात्रा कर रही थीं. उन्हें बरौनी पहुंचना था. वह दिल्ली में ही पढ़ाई करती हैं. उन्होंने बताया कि, बक्सर से ट्रेन खुलने के बाद हमलोग बेड पर सोने की तैयारी कर रहे थे. थोड़ी देर के बाद ही अचानक आवाज आयी. ऐसा लगा कि अब हम बचने वाले नहीं हैं. बोगी में चीख-पुकार होने लगी. अंधेरा छा गया. किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो गया. महिला एम-2 बोगी में सवार थीं. बोगी इस तरह करवट ले चुकी थी कि उसके दरवाजे बंद हो गये थे. काफी देर तक हम चिल्लाते रहे. कई लोग रो रहे थे और अपनों की खैरियत जानने के लिए उनके पास पहुंच रहे थे.