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केके पाठक का असर, बिहार में 45 दिन में 1.5 लाख बच्चों के नाम स्कूलों से कटे, अब कॉलेज की बारी

पटना. बिहार के सरकारी स्कूलों के तर्ज पर अब विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का भी नाम काटा जायेगा. साथ ही रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया जायेगा. बिना 75 फीसदी उपस्थिति के प्रवेश पत्र जारी नहीं किया जायेगा. यह तमाम बातें उस आदेश पत्र में है जिसे उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. रेखा कुमारी की ओर से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को भेजा गया है. साथ हीं इसे सख्ती से लागू कराने का निर्देश भी दिया गया है.

अब आपके मन में यह ख्याल आ रहा होगा कि ऐसा नहीं होगा यह सिर्फ कागजों में रह जायेगा तो आपको बता दें कि राज्य के सरकारी स्कूलों से लगातार अनुपस्थित रहने वाले 19 लाख बच्चों के नाम पिछले डेढ़ माह में काटे गये हैं. इनमें सबसे अधिक चौथी और पांचवीं के दो-दो लाख से अधिक बच्चे शामिल हैं. इसी तरह अब बारी कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के है.

3 दिन तक गायब रहने वाले छात्र-छात्राओं का कटेगा नाम

बिहार के विश्वविद्यालयों की स्नातकोत्तर कक्षाओं और डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स अगर लगातार तीन दिनों तक बिना पूर्व सूचना के (अनधिकृत रूप से) अनुपस्थित रहते हैं तो उनका नाम काट दिया जाए. इसका सख्ती से पालन करने का निर्देश शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों को दिया है. मालूम हो कि सितंबर माह से राज्य के स्कूलों से गैरहाजिर रहने वाले बच्चों का नाम काटा जा रहा है. इसी तर्ज पर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को भी कार्रवाई करने को कहा गया है. विश्वविद्यालयों को कहा गया है कि बिना वाजिब कारण के कोई विद्यार्थी लगातार तीन दिनों तक कक्षा से अनुपस्थित है, तो उसे नोटिस भेजकर जवाब मांगें. अगर, छात्र या छात्रा द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं है, तो उसका नाम काट दें. साथ ही उसका पंजीकरण भी रद्द करने की कार्रवाई करें. इसके अलावा जिन विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत या इससे ज्यादा उपस्थिति हो, उन्हें ही परीक्षा में बैठने के लिए प्रवेश पत्र निर्गत करें. यदि 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति है तो प्रवेश पत्र जारी नहीं किया जाए.

रोज कट रहे हैं स्कूलों से नाम

आपको बता दें कि बिहार के सरकारी विद्यालयों से लगातार गायब रहने वाले 19 लाख बच्चों के नाम पिछले डेढ़ माह में काटे गये हैं. इनमें सबसे अधिक चौथी और पांचवीं के दो-दो लाख से अधिक बच्चे शामिल हैं. पहली के 1.20 लाख, दूसरी के 1.55 लाख और तीसरी के 1.95 लाख बच्चे शामिल हैं. सबसे कम दसवीं के 21 हजार और 12 वीं के 15 हजार विद्यार्थी के नाम काटे गये हैं. शिक्षा विभाग का प्रधानाध्यापकों को निर्देश है कि तीन दिनों तक लगातार स्कूलों से गायब रहने वाले बच्चों के अभिभावकों को नोटिस दें.