बिहार विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन सदन के बाहर और भीतर सियासत का तापमान अचानक बढ़ गया, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र ने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उनका आरोप है कि बिहार में हो रहे पुलिस एनकाउंटर किसी निष्पक्ष रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि चुनिंदा जाति और समुदाय को निशाना बनाने की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
भाई वीरेंद्र ने कहा कि अपराध पर नियंत्रण जरूरी है, लेकिन कार्रवाई का तरीका भी उतना ही पारदर्शी और न्यायपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों लगातार ऐसे नाम सामने आ रहे हैं, जिनसे यह आभास होता है कि एक विशेष वर्ग के लोगों को ही अपराध से जोड़कर पेश किया जा रहा है। विधायक का मानना है कि इससे समाज में गलत संदेश जा रहा है और आपसी सौहार्द पर भी असर पड़ सकता है।
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राजद विधायक ने आगे आरोप लगाया कि बिहार में संगठित अपराध अभी भी सक्रिय है और कई इलाकों से अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, लेकिन सरकार केवल दिखावटी सख्ती कर रही है। उनके अनुसार, असली अपराधी अक्सर बच निकलते हैं, जबकि कमजोर तबकों को आसान निशाना बनाया जाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी भाई वीरेंद्र ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार की दिशा और सोच भटक चुकी है और मुख्यमंत्री को सही सलाह नहीं मिल रही। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाजी आने वाले दिनों में कानून-व्यवस्था के मुद्दे को और केंद्र में ला सकती है। बजट सत्र के बीच उठा यह विवाद न केवल सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि बिहार की राजनीति में टकराव और तेज होने वाला है।