पटना: बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव को लेकर राज्य में गहमागहमी का माहौल है। सोमवार को नाम वापसी के अंतिम समय तक किसी भी उम्मीदवार ने अपने नाम वापस नहीं लिए जिसके बाद अब राज्यसभा चुनाव भी दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां NDA सभी पांच सीटों पर अपना दावा ठोक रहा है तो दूसरी तरफ महागठबंधन ने सिर्फ एक प्रत्याशी ही मैदान में उतारा है। अपने प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को महागठबंधन के विधायकों की बैठक बुलाई है। बैठक में तेजस्वी सभी विधायकों को अपने प्रत्याशी की जीत के लिए वोटिंग का निर्देश देंगे।
इधर खबर सामने आ रही है कि तेजस्वी ने महागठबंधन प्रत्याशी के समर्थन में वोटिंग को लेकर असदुद्दीन ओवैसी के सभी पांच विधायकों को बैठक में आमंत्रित नहीं किया है। इस मामले में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि तेजस्वी की बैठक के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है और न ही उन्होंने हमारे विधायकों को बैठक में आमंत्रित किया है। बता दें कि राज्यसभा चुनाव की घोषणा के दौरान राजद ने ओवैसी की पार्टी से भी समर्थन की बात कही थी और बगैर ओवैसी की पार्टी के समर्थन के राजद के उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव में जीत भी हासिल नहीं कर पाएंगे।
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राज्यसभा चुनाव को लेकर AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम ने सोमवार को नई दिल्ली में पार्टी प्रमुख ओवैसी से मुलाकात भी की थी और दोनों नेताओं ने चर्चा की। इस दौरान ओवैसी ने अपने सभी विधायकों को वेट एंड वाच का निर्देश दिया है। राज्यसभा चुनाव को लेकर ओवैसी ने अपने विधायकों से कहा है कि अभी आराम से बैठो और इंतजार करो। इसका मतलब साफ है कि ओवैसी ने अभी किसी भी उम्मीदवार को समर्थन देने का अंतिम फैसला नहीं लिया है।
इससे पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर एक तरफ जहां NDA की तरफ से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत 5 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है तो दूसरी तरफ राजद के अमरेंद्रधारी सिंह ने भी अपना नामांकन दाखिल किया है। विधायकों की संख्या के हिसाब से NDA की 4 सीटों पर जीत तय है तो दूसरी तरफ पांचवीं सीट के लिए NDA के पास 38 वोट हैं जबकि महागठबंधन के पास 35। इसके साथ ही 5 वोट ओवैसी की पार्टी और एक वोट बसपा का है।
राजद ने राज्यसभा चुनाव की घोषणा के दौरान यह कहा था कि ओवैसी भाजपा के विरुद्ध हमारे साथ आयेंगे और हमारे उम्मीदवार को अपना समर्थन करेंगे वहीं ओवैसी की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी कहा था कि उम्मीदवार हमारी पार्टी से हो और राजद हमें अपना समर्थन दे। अब तेजस्वी की बैठक में ओवैसी के विधायकों को आमंत्रित नहीं किया गया है जिसके बाद अब देखना दिलचस्प होगा कि एक सीट पर किस तरह की लड़ाई होती है और किस उम्मीदवार के सर जीत का सेहरा बंधता है।
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