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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इशारों में किया बड़ा हमला, BJP नेता को जवाब नहीं सूझ रहा..

Desk- ऐसा लगता है जैसे आरएसएस और बीजेपी के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. और बीजेपी की वर्तमान आलाकमान से आरएसएस नाराज है. इस चुनाव में भी यह बातें सामने आई कि आरएसएस ने उस तरह की सक्रिय  भूमिका नहीं निभाई जो उसने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान निभाई थी.

 चुनाव संपन्न होने और मोदी सरकार की तीसरी बार शपथ लेने के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने चुनाव के दौरान दोनों तरफ से की गई बयान बाजी और करीब 1 साल से ज्यादा समय से मणिपुर में चल रही हिंसा को लेकर बेबाकी की से अपनी बात रखी है.

 आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एक सच्चे सेवक में अहंकार नहीं होता और वह दूसरो को नुकसान पहुंचाये बिना अपना काम करता है। लोकसभा चुनाव प्रचार का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि इसमें मर्यादा का ख्याल नहीं रखा गया. जो वास्तविक सेवक है, जिसको वास्तविक सेवा कहा जा सकता है वो मर्यादा से चलता है। उस मर्यादा का पालन कर के जो चलता है वो कर्म करता है लेकिन कर्मों में लिप्त नहीं होता, उसमें अहंकार नहीं आता कि मैंने किया है और वही सेवक कहलाने का अधिकारी भी रहता है।यह बातें परोक्ष रूप से कहीं-कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ इशारा करती है जो इस बार उन्होंने मोदी की गारंटी पर ज्यादा बल दिया.

मोहन भागवत ने लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान जिस तरह की बातें कही गईं, जिस तरह से दोनो पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए। जिस तरह से किसी को इस बात की परवाह नहीं थी कि जो कुछ किया जा रहा है उसके कारण सामाजिक विभाजन पैदा हो रहा है और बिना किसी कारण के संघ को इसमें घसीटा गया और झूठ फैलाया गया। इसके साथ ही मोहन भागवत में मणिपुर को लेकर चिंता जताई और पूछा कि जमीनी स्तर पर इस समस्या पर कौन ध्यान देगा। उन्होंने कहा कि इस प्राथमिकता के तौर पर इस समस्या से निबटना होगा। पिछले एक साल से मणिपुर शांति का इंतजार कर रहा है। पिछले एक दशक से यह शांतिपूर्ण था। ऐसा लग रहा था कि पुराने जमानें की बंदूक संस्कृति खत्म हो गई है लेकिन यह फिर से शुरू हो गया।

 बताते चलें कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का एक बयान सोशल मीडिया पर लगातार शेयर किया जा रहा है जिसमें जेपी नड्डा ने कहा था कि अब वाजपेयी जी का जमाना नहीं है, कि उसे पार्टी के संचालन में RSS के हस्तक्षेप की जरूरत हो. अब पार्टी बहुत आगे निकल चुकी है और वह अपनी समस्या को अपनी तरह से सुलझाने में सक्षम है. ऐसा लगता है कि नड्डा के इस बयान को आरएसएस ने गंभीरता से लिया, और इस 2024 के लोकसभा चुनाव में वह सक्रियता नहीं दिखाई जो उसने 2014 और 19 में दिखाई थी. हालांकि इसको लेकर आधिकारिक रूप से ना तो बीजेपी और न हीं आरएसएस के नेता किसी तरह की टीका टिप्पणी कर रहे हैं , पर मोहन भागवत ने इशारों में ही बहुत बातें कह दी हैं .

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