पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शराबबंदी को खत्म करने और कानून की समीक्षा की मांग जोरों पर रही। पक्ष और विपक्ष दोनों ही तरफ के विधायकों ने सरकार से शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की। इसके बाद अब एक बार फिर शराबबंदी खत्म करने की मांग उठने लगी है। इस बार नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के एक सांसद ने एक भी शराबबंदी खत्म करने की मांग कर दी। हालांकि उन्होंने शराबबंदी कानून को भी सही ठहराया और इससे होने वाले लाभ की भी बात कही और कहा कि यह नीति आज तक पूरी दुनिया में कहीं भी सफल नहीं हुई है।
जदयू के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि बहुत कारण है और अगर यह हट जाये तो बेहतर ही होगा। हालांकि शराबबंदी के पीछे सीएम नीतीश की नियत बिल्कुल सही थी, उनके इरादे सही थे कि इससे लोगों में गलत भावना आती है, मारपीट होता है, गरीब के घरों में उनके बच्चों के पढाई का पैसा शराब में चला जाता है बावजूद इसके यह प्रैक्टिकल नहीं है। शराब अभी भी मिल ही रही है। बिहार की सीमा झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से लगती है जहां शराब ट्रकों से आती है। ऐसे में यह व्यावहारिक नहीं है कि बिहार में शराबबंदी सफल हो।
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बता दें कि बिहार में वर्ष 2016 से शराबबंदी लागू है और अब तक इसके उल्लंघन के आरोप में करीब 10 लाख से अधिक मुकदमे दर्ज किये गए हैं जबकि लाखों लोग जेल भी गए। शराबबंदी के बावजूद बिहार के गांव से लेकर शहरों तक शराब उपलब्ध है और पीने वाले पी रहे हैं। शराबबंदी कानून की वजह से राज्य सरकार को राजस्व का भी बहुत अधिक घाटा हो रहा है। बता दें कि विधानसभा सत्र के दौरान पक्ष और विपक्ष के कई विधायकों ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की थी जबकि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी लंबे समय से शराबबंदी कानून पर सवाल उठाते रहे हैं।
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