बिहार विधानसभा सत्र के दौरान एक बार फिर शराबबंदी के मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर विपक्ष से अधिक सता पक्ष के नेता ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बड़ी मांग करने में लग गए हैं। हालांकि ये नेता शराबबंदी की तारीफ भी कर रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ इसकी समीक्षा की भी मांग कर रहे हैं। मंगलवार को रालोमो के विधायक माधव आनंद ने जब शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की तो अब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी बड़ा बयान दिया है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि मैं तो पहले से ही शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग कर रहा हूँ। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पहले भी मुख्यमंत्री ने कई बार शराबबंदी कानून की समीक्षा की और बदलाव भी किये हैं। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि कानून गलत है बल्कि इसके क्रियान्वयन का तरीका गलत है। पहले ही समीक्षा के बाद कानून में बदलाव किया जा चुका है कि अगर कोई शराब पी कर या थोडा बहुत अपने साथ लेकर जा रहा है तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जायेगा लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव एससी और एसटी समुदाय के लोगों पर पड़ता है।
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केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि राज्य में वैसे लोग जिनके पास महंगी शराब पीने के पैसे हैं वे लोग नहीं पकड़े नहीं जाते हैं क्योंकि वे चुपचाप शराब ला कर घर में रख लेते हैं और रोज पीते हैं लेकिन वैसे लोग पकड़े जाते हैं जो दिन भर मेहनत करने के बाद अपनी थकान मिटाने के लिए थोड़ी बहुत शराब लेकर अपने घर जाते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी की वजह से कुछ लोग शराब बनाते भी हैं लेकिन वह जल्दी जल्दी में जहरीली शराब बना लेते हैं जिसे पी कर वह बीमार भी होते हैं और अपनी जान भी गंवाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी शराब पीने से लोगों के उम्र कम हो रहे हैं। वहीं दूसरे राज्यों से महंगी शराब बिहार में लाइ जाती है जिसकी वजह से बिहार का पैसा दूसरे राज्यों में जाता है। इतना ही नहीं राज्य को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है और बाहर से आने वाली महंगी शराब का पैसा बाहर जा रहा है। इतना ही नहीं शराबबंदी की वजह से जो मुकदमेबाजी हो रही है उसमें सबसे अधिक हमारे समुदाय के लोग हैं।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से शराबबंदी की समीक्षा की मांग करता हूँ। इसके साथ ही गृह मंत्री सम्राट चौधरी सख्ती से कानून लागू करवा रहे हैं और अन्य कई तरह की बात कर रहे हैं तो उन्हें एक ध्यान इस मामले में भी देना चाहिए। शराबबंदी की वजह से गरीब लोगों के विरुद्ध कार्रवाई रुकनी चाहिए।
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