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डैमेज कंट्रोल की कोशिश में उपेंद्र कुशवाहा, बैठक से नदारद दिखे विधायक रामेश्वर महतो तो कहा...

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में टूट की खबरों के बीच RLM चीफ उपेंद्र कुशवाहा लगातार डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटे हुए हैं. उन्होंने इसी कड़ी में पार्टी के प्रदेश नेतृत्व में बदलाव किया और सभी जातियों को साधने की कोशिश की है...

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डैमेज कंट्रोल की कोशिश में उपेंद्र कुशवाहा, बैठक से नदारद दिखे विधायक रामेश्वर महतो तो कहा...- फोटो : Darsh NEWS

पटना: पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं रालोमो चीफ उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी में हो रही टूट को रोकने और डैमेज कंट्रोल करने में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी में एक प्रदेश अध्यक्ष और दो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश महासचिव और प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी पार्टी नेताओं को मनोनीत किया है। इस मामले को लेकर रालोमो चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने शुक्रवार को राजधानी पटना में एक प्रेसवार्ता किया और पार्टी में एकजुटता का दावा किया। हालांकि उपेंद्र कुशवाहा की बैठक और प्रेसवार्ता के दौरान विधायक रामेश्वर महतो गायब दिखे।

उपेंद्र कुशवाहा ने दिनारा के विधायक आलोक सिंह को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है जबकि प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। इसके साथ ही उन्होंने हिमांशु पटेल को प्रदेश प्रधान महासचिव और मदन चौधरी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। माना जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी में नेताओं की नाराजगी को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं पहले ही कहा था ये चर्चा सिर्फ मीडिया में चल रही है, हमें तो कुछ पता ही नहीं है।

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इस दौरान विधायक रामेश्वर महतो के बैठक में नहीं आने के सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बैठक में विधायक स्नेहलता भी नहीं हैं इसका ये मतलब नहीं है कि वे नाराज हैं। वैसे भी यह कोई विधायक दल की बैठक नहीं है। पार्टी में कोई विवाद नहीं है और सभी एकजुट हैं। बताया जा रहा है कि RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने हाल ही में पटना में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी।इस बैठक के दौरान संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर चर्चा की गई और फिर दिनारा के विधायक आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद किसी सदन की सदस्यता के बिना ही उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल करवा दिया जिसके बाद यह कहा जा रहा था कि कुशवाहा की पार्टी के तीन विधायक दूसरे दल के संपर्क में हैं और जल्द ही पार्टी छोड़ देंगे।

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