बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के हाल के बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के विरुद्ध टिप्पणी करने की योग्यता नेता प्रतिपक्ष की नहीं हैं। नेता प्रतिपक्ष भी अपने पिता की तरह जात-पात का ज़हर समाज में फैलाकर राजनीति करना चाहते हैं। किन्तु उन्हें देखना चाहिए कि उनके पिता का क्या हाल हुआ! नकारात्मक राजनीति को छोड़कर नेता प्रतिपक्ष को भी सकारात्मक राजनीति करनी चाहिए और राज्य के विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संघ लोकसेवा आयोग द्वारा प्रकाशित जिस विज्ञापन पर नेता प्रतिपक्ष ने टिप्पणी की है उसके महत्व को उन्हें समझना चाहिए। हरेक मामले में जातीय ज़हर की राजनीति का कोई महत्व नहीं होता। देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी आरक्षण के पूर्णतः पक्षधर हैं। नीतीश कुमार ने ही बिहार में पहली बार महिलाओं को अलग से आरक्षण की सुविधा दी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र मे शिक्षा और शिक्षित होना बहुत जरुरी है।लालू परिवार के पंद्रह वर्षों के शासनकाल में शिक्षा में सुधार की कार्रवाई नहीं हुई। राजद को जात-पात की राजनीति और भ्रष्टाचार से फुरसत मिले तब तो शिक्षा के बारे में और राज्य के विकास के बारे वो कुछ सोच और कर सकें।किन्तु उन्हें मालूम है कि शिक्षित समाज उन्हें समर्थन नहीं देगा साथ ही उनकी भ्रष्टाचार वाली मानसिकता पर अंकुश लग जायेगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुचिता की राजनीति का आदर्श स्थापित किया है। डबल इंजन की सरकार में राज्य का सर्वांगीण विकास हो रहा है। राज्य की जनता यह सब देख रही है। नेता प्रतिपक्ष को भी सुचिता की राजनीति करते हुए अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन करना चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में नेता प्रतिपक्ष की आस्था का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि विधानसभा सत्र में अनुपस्थित रहें और ना ही क्षेत्र में किसी के सुख-दुख का सहभागी बने।सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने से जनता का कुछ भला नहीं होने वाला है। धरातल पर जनता के साथ जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं का निदान व अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।