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इजरायल-फिलिस्तीन के बीच जंग जारी, लेकिन पाकिस्तान क्यों कर रहा इजरायल का विरोध ?

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष जारी है और अब विश्व युद्ध जैसे हालात बन गए हैं. दुनिया दो धडों में बंट गई है. अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने खुलकर इजरायल को समर्थन देने की बात कही है तो फिलिस्तीन के समर्थन में अरब देश खड़े हैं. इजरायल ने 11 लाख फिलिस्तीनी आबादी को उत्तरी गाजा क्षेत्र को 24 घंटे के अंदर खाली करने को कहा है. हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने इसपर ऐतराज भी जताया है, लेकिन इजरायल फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा है. इजरायल ने गाजा पट्टी पर जमीनी जंग लड़ने के संकेत दिए हैं, और सीमा पर 3 लाख 36 हजार सैनिकों की तैनाती कर दी है. 

इजरायल-फिलिस्तीन के बीच युद्ध में भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन PM मोदी ने इजरायल के साथ खड़े रहने की बात कही है. पड़ोसी देश पाकिस्तान ने खुलकर इजरायल का विरोध किया है और अन्य अरब मुस्लिम देशों के साथ जा खड़ा हुआ है. हालांकि, यह पहला मौका नहीं है, जब पाकिस्तान ने इजरायल का विरोध किया है. 

पाकिस्तान इजरायल का गठन होने से पहले से ही उसका विरोध करता आ रहा है. 1947 में जब संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन बंटवारे का प्रस्ताव आया था, तब भारत के साथ-साथ पाकिस्तान ने भी उसका विरोध किया था. भारत जहां धर्म के आधार पर किसी देश के बंटवारे का विरोध कर रहा था, वहीं पाकिस्तान मुस्लिम देश होने का फर्ज निभा रहा था और मुस्लिम बहुल फिलिस्तीन का साथ दे रहा था. 

1948 में इजरायल को एक स्वतंत्र देश का दर्जा मिला, भारत ने 1950 में उसे संप्रभु देश के तौर पर मान्यता दे दी लेकिन पाकिस्तान इजरायल को आज तक देश मानता ही नहीं. लिहाजा पाकिस्तान और इजरायल के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है. पाकिस्तान, ईरान, ईराक, सऊदी अरब, बांग्लादेश, भूटान, कुवैत, लेबनान, और इंडोनेशिया सहित अन्य उन 30 देशों में से एक है, जिन्होंने इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने से इनकार कर दिया है. 

बांग्लादेश से क्या है कनेक्शन ? 

इजरायल से भारत की दोस्ती भले ढाई-तीन दशक पुरानी हो लेकिन जब भारत और इजरायल के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं थे, तब भी इजरायल ने भारत की मदद की थी. ये बात 1971 की है. इजरायल ने पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में भारत की रक्षा क्षेत्र में बड़ी मदद की थी, जिससे पाकिस्तान दो टुकड़ों में बंट गया था. श्रीनाथ राघवन की किताब '1971' में 14 दिवसीय युद्ध के बारे में खुलासा किया गया है कि कैसे इजरायल ने भारत की मदद की थी. 

उस वक्त इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं और इजरायल की गोल्डा मेयर. गोल्डा मेयर ने तब रक्षा खरीद के प्रस्ताव पर एक अहम फैसला लेते हुए ईरान जा रहे हथियारों की खेप को भारत भिजवा दिया था. हालांकि इजरायल खुद उस वक्त हथियारों की कमी झेल रहा था, बावजूद इसके गोल्डा मेयर ने ये फैसला लिया था. गोल्डा इजरायल की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और उन्हें भी आयरन लेडी कहा जाता था. हालांकि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध करीब 20 साल बाद 1992 में स्थापित हुए, जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे. 

राघवन की पुस्तक में बताया गया है कि 4 अगस्त 1971 को तत्कालीन रॉ प्रमुख आरएन काओ ने हक्सर को एक नोट लिखा था, जिसमें विस्तार से बताया गया था कि इजरायली प्रशिक्षकों के साथ हथियारों की खेप हवाई मार्ग से कैसे पहुंचाई जाएगी। ये हथियार बांग्लादेश में तैनात भारतीय सेना और बांग्लादेश की आजादी के लिए लड़ रही मुक्ति वाहिनी की गुरिल्ला सेना के पास पहुँचेंगी, जो पाकिस्तानियों को आत्मसमर्पण करने के लिए पाकिस्तान के साथ युद्ध करने का फैसला किया था। इसके 13 दिनों बाद ही पाकिस्तान के जनरल नियाजी ने 90 हजार फौजियों के साथ भारत के सामने सरेंडर कर दिया था। उसके बाद भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की अंतरिम सरकारों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश का गठन हुआ था।

कारगिल युद्ध में भी की थी मदद

इजरायल ने 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ लड़े गए कारगिल युद्ध में भी भारत की मदद की थी. तब कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर बैठे पाकिस्तानी सैनिकों के खात्मे के लिए इजारयल ने लेजर गाइडेड मिसाइल भारत को दी थी. उस वक्त भारतीय वायुसेना को सीमा पार बैठे दुश्मनों की सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी. इससे जंग में मुश्किल हो रही थी, तब इजरायल ने IAF मिराज 2000H लड़ाकू विमानों के लिए लेजर- निर्देशित मिसाइलें प्रदान की थीं. इसके अलावा लाइटनिंग इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टार्रेटिंग पॉड्स भी भारत को दिए थे. इन पॉड्स की खासियत यह थी कि उसमें लेजर डेजिग्रेटर के अलावा हाई रिजॉल्यूशन कैमरे भी लगे थे, जो अधिक ऊंचाई पर भी दुश्मन के ठिकाने की तस्वीरें साफ दिखाता था. इतना ही नहीं, कारगिल युद्ध के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों ने भारत को हथियारों की खेप की डिलीवरी में देरी करने के लिए इजरायल को मजबूर किया था, लेकिन इजरायल विदेशी दबाव में नहीं झुका और समय से पहले भारत को हथियारों की खेप पहुंचाई थी, जिनका ऑर्डर कारगिल में पाक घुसपैठ से पहले दिया गया था.