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वाह रे वाह ! शिक्षकों को नहीं पता कौन हैं शिक्षा मंत्री, CM का नाम लिखा- 'नीतेश कुमार', बच्चे कैसे बनेंगे IS और IAS

बिहार में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति क्या है यह तो किसी से भी छिपी नहीं है. कई बार बिहार के शिक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गई है और मजाक बनाया गया है. और मजाक बनाया भी जाए क्यों ना... जब स्कूल के शिक्षक को राज्य के मुख्यमंत्री का नाम तक लिखना नहीं आता हो और यह तक नहीं पता हो कि शिक्षा मंत्री आखिर हैं कौन... तो ऐसे में शिक्षा व्यवस्था का मजाक उड़ना लाजिमी है. दूसरी तरफ यह बड़ा सवाल कि, ऐसी स्थिति में बिहार के बच्चे आईएस और आईएएस कैसे बनेंगे. बच्चों का भविष्य साफ तौर पर पूरी तरह से अंधकार में दिख रहा है. 

CM का नाम लिखा- 'नीतेश कुमार'

बता दें कि, यह पूरा मामला सीतामढ़ी के जिले के बथनाहा प्रखंड के दोस्तपुर खैड़वी राजकीय मध्य विद्यालय का है. जहां पत्रकारों द्वारा पूछने पर शिक्षिका को बिहार के मुख्यमंत्री तक का नाम नहीं बता पाती हैं. कुछ देर बाद शिक्षिका को मुख्यमंत्री का नाम याद भी आता है तो वह सही तरीके से मुख्यमंत्री का नाम ब्लैक बोर्ड पर नहीं लिख पाती है. मैडम नीतीश कुमार को 'नीतेश कुमार' लिख देती है. इतना ही नहीं, जब अन्य शिक्षिकाओं से शिक्षा मंत्री का नाम पूछा गया तो वे पंखा देखने लगी. जिस विभाग से जुड़ कर वे सभी काम कर रही हैं, उन्हें उस विभाग के मंत्री जी तक का नाम भी नहीं पता. 

उपमुख्यमंत्री का नाम भी शिक्षिकाओं को याद नहीं 

एक ओर जहां बिहार की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ऐड़ी-चोटी का जोड़ लगाए हुए हैं. खुद कई बार सरकारी स्कूलों का निरीक्षण कर चुके हैं तो वहीं दूसरी तरफ धरातल पर जो सच्चाई सामने आई, वह सबके सामने है. स्कूल में मौजूद बच्चों को पढ़ा रही शिक्षिका से जब डिप्टी सीएम का नाम पूछा गया तो वह भी उन्हें पता नहीं था. वहीं, शिक्षा व्यवस्था की इस तरह की तस्वीर सामने आने के बाद कई तरह के सवाल किये किये जा रहे हैं. 

बिहार के बच्चे कैसे बनेंगे IS और IAS  

वहीं, इन तमाम परिस्थितियों की जानकारी जब जिला शिक्षा पदाधिकारी को दी गई तब उन्होंने इस बारे में पहले से कोई भी जानकारी होने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि, इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है. मामला संज्ञान में आया है. पूरे मामले की जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी. बहरहाल, बच्चों के भविष्य को संवारने का जिम्मा शिक्षकों को दिया जाता है. लेकिन, जब उनके ही पास शिक्षा का अभाव है तो ऐसे में बच्चों के भविष्य का क्या होगा. बिहार के बच्चे आखिर कैसे अब आईएस और आईएएस बनेंगे.

दर्श न्यूज़ के लिए सीतामढ़ी से सौरभ की रिपोर्ट