एक जिले में दर्जनों रिश्तेदार शिक्षक! अररिया संस्कृत विद्यालय भर्ती पर गंभीर सवाल
अररिया जिले के संस्कृत विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति को लेकर सामने आए आरोपों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। सिकटी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कई विद्यालयों में वर्षों से चली आ रही नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अब गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। उम्र में हेराफेरी, दस्तावेजों में गड़बड़ी और कथित तौर पर एक ही परिवार के लोगों को प्राथमिकता दिए जाने के आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक जिले में संचालित लगभग बीस संस्कृत विद्यालयों में कुल 113 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई जा रही है जिनके आपसी रिश्ते हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या नियुक्तियां योग्यता के आधार पर हुईं या फिर अंदरूनी मिलीभगत के जरिए पद बांटे गए।
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स्थानीय नागरिक सागर झा द्वारा सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारियों से कई विसंगतियां उजागर हुईं। मतदाता सूची, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज उम्र के आंकड़ों में अंतर पाए जाने की बात सामने आई है। कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति की उम्र अलग-अलग रिकॉर्ड में भिन्न दिखाई दे रही है, जो चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा आघात है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय जांच एजेंसी की भूमिका भी सामने आई है। राज्य के मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही जिला स्तर पर भी शिक्षा विभाग ने संबंधित विद्यालयों से शिक्षकों के सभी प्रमाण पत्र और नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराने को कहा है।
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यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा तंत्र में व्याप्त संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह साबित होगा कि वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां की गईं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या इससे भविष्य में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।