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BPSC TRE-4 गायब, सड़कों पर उतरे शिक्षक अभ्यर्थी! क्या सरकार टाल रही है बड़ी भर्ती?

BPSC परीक्षा कैलेंडर से TRE-4 के गायब रहने से शिक्षक अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। इसे लेकर सरकार पर भर्ती प्रक्रिया टालने का आरोप लग रहा है, वहीं TRE-4 और लाइब्रेरियन वैकेंसी की मांग को लेकर अभ्यर्थी पटना की सड़कों पर उतर आए हैं।

BPSC TRE-4 missing, teacher candidates take to the streets
BPSC TRE-4 गायब, सड़कों पर उतरे शिक्षक अभ्यर्थी! क्या सरकार टाल रही है बड़ी भर्ती?- फोटो : Darsh NEWS

बिहार में शिक्षक बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं के लिए एक बार फिर निराशा भरी खबर सामने आई है। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा 2026 तक की प्रतियोगी परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया गया, लेकिन इसमें कहीं भी शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 का नाम शामिल नहीं है। कैलेंडर से TRE-4 के गायब रहने ने अभ्यर्थियों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं और सरकार की मंशा पर संदेह बढ़ा दिया है।

BPSC के इस कैलेंडर में 70वीं, 71वीं और 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा, न्यायिक सेवा, APO, तकनीकी और प्रशासनिक पदों समेत 50 से अधिक भर्तियों की संभावित तिथियां घोषित की गई हैं। इसके साथ ही विशेष शिक्षक और सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी जैसी भर्तियों का भी उल्लेख है, लेकिन सबसे अहम मानी जा रही शिक्षक भर्ती परीक्षा का जिक्र न होना गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले एक साल से सरकार सिर्फ आश्वासन दे रही है। कभी भर्ती जल्द शुरू होने की बात कही जाती है तो कभी पदों के आकलन का हवाला दिया जाता है। शिक्षा मंत्री पहले ही यह कह चुके हैं कि लगभग 25 हजार शिक्षक पदों पर भर्ती की संभावना है और जनवरी के बाद TRE-4 की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आई है।

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इसी नाराजगी के बीच आज शिक्षक अभ्यर्थी और लाइब्रेरियन पद के उम्मीदवार पटना की सड़कों पर उतर आए हैं। पटना कॉलेज से शुरू होकर जेपी गोलंबर तक प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर TRE-4 को टाल रही है। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में आयु सीमा में बढ़ोतरी और बिहार के अभ्यर्थियों के लिए डोमिसाइल नीति लागू करना शामिल है। उनका कहना है कि लंबी देरी के कारण कई योग्य उम्मीदवार आयु सीमा पार कर रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।

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यह पूरा मामला केवल एक परीक्षा के कैलेंडर से जुड़ा नहीं है, बल्कि राज्य के शिक्षा तंत्र और युवाओं के भरोसे से जुड़ा हुआ है। अगर सरकार और आयोग जल्द ही स्पष्ट निर्णय नहीं लेते, तो यह असंतोष और गहराता जाएगा। समय आ गया है कि केवल घोषणाओं के बजाय ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि योग्य युवाओं को उनका हक मिल सके और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सके।


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