पटना पुलिस की जांच पर उठे कई सवाल, NEET छात्रा के परिजनों ने की CBI जांच की मांग...
पटना: बीते दिनों राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रह रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब गहराता जा रहा है। छात्रा को नींद की टैबलेट का ओवरडोज़ बता कर हॉस्टल प्रबंधन ने अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन पहले दिन से परिजन उसके साथ गलत काम किये जाने का दावा करते रहे। छात्रा ने करीब 5 दिनों तक इलाज के बाद दम तोड़ दिया लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पटना पुलिस पर भी सवालिया निशान लगने हैं।
पुलिस पर भी लगाये गंभीर आरोप
इस मामले में मृतिका के परिजनों ने राजधानी पटना में एक प्रेस कांफ्रेंस किया और चित्रगुप्त नगर थाना की थानाध्यक्ष समेत SSP पर भी कई गंभीर आरोप लगाये। परिजनों ने कहा कि हम पहले दिन से पूरे मामले की गंभीरता से जांच की मांग कर रहे हैं लेकिन थानाध्यक्ष ने हॉस्टल संचालक और अस्पताल के प्रबंधक की मिलीभगत से पूरा मामला रफा दफा करने की कोशिश की। हमलोग पहले दिन से आशंका व्यक्त कर रहे थे कि हमारी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया है लेकिन पटना के SSP ने भी बगैर जांच किये एक प्राइवेट डॉक्टर के बयान पर प्रेस में यह कह दिया कि ऐसी कोई बात नहीं है।
डॉक्टर, पुलिस सब मिले हुए हैं
परिजनों ने कहा कि जब हम अपनी बेटी के शव के साथ न्याय की मांग कर रहे थे तो पुलिस ने हमारे ऊपर FIR दर्ज कर दी लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरा मामला साफ हो गया है। उन्होंने हॉस्टल संचालक, हॉस्टल के मालिक, प्रभात मेमोरियल अस्पताल के संचालक डॉ सतीश और चित्रगुप्त नगर थाना की थानाध्यक्ष रौशनी कुमारी पर गंभीर आरोप लगाये और कहा कि सबने मिल कर न सिर्फ मामला रफा दफा करने की कोशिश की बल्कि हमलोगों को रूपये का प्रलोभन दिया गया और अन्य तरीकों से भी दबाव बनाये गए।
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होश में आई बच्ची से बात नहीं करने दी
परिजनों ने कहा कि प्रभात मेमोरियल अस्पताल में इलाज के दौरान छात्रा करीब 4 घंटे के लिए होश में आई थी। इस दौरान जब उसकी मां उसके पास गई तो छात्रा ने रोते हुए सारी बताने की कोशिश की तो डॉक्टरों ने हम सबको धक्का मार कर बाहर कर दिया और पता नहीं क्या इंजेक्शन दिया कि कोमा में गई छात्रा की मौत हो गई लेकिन वह दुबारा होश में नहीं आई। परिजनों ने पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाये और कहा कि पुलिस ने हमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक देने के लिए करीब 12 घंटे इंतजार करवाया और निकलते वक्त SHO ने कहा कि यह 10 वर्षों बाद पता चलेगा कि आपने क्या किया है।
मृतिका छात्रा का पोस्टमार्टम रिपोर्ट
पटना पुलिस पर नहीं भरोसा
परिजनों ने पटना पुलिस पर अविश्वास जताते हुए कहा कि जब पटना के SSP ने मामले की सही जांच किये बगैर बयान जारी कर दिया तो फिर अब पटना पुलिस पर क्या भरोसा करें। एक तरफ SHO आरोपियों के साथ मिली हुई है दूसरी तरफ SSP बगैर जांच के बयान जारी कर रहे हैं तो अब हम सरकार से मांग करते हैं कि इस मामले की जांच CBI या किसी अन्य निष्पक्ष जांच एजेंसी के द्वारा कराई जाये।
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हॉस्टल संचालक पर लगाये गंभीर आरोप
परिजनों ने हॉस्टल संचालक पर कई गंभीर आरोप लगाये और कहा कि हॉस्टल के मालिक और संचालक लंबे समय से कोई बड़ा गिरोह चला रहे हैं। ये लोग अक्सर किसी न किसी छात्रा को अपना शिकार बनाते हैं और उसके साथ इस तरह से दरिंदगी करते हैं। परिजनों ने कहा कि हॉस्टल संचालक ने अस्पताल संचालक के साथ मिली भगत कर न सिर्फ मामले को रफा दफा करने की कोशिश की बल्कि परिजनों पर भी दबाव बनाया। बच्ची के शरीर पर कई जगहों पर चोट और जख्म के निशान हैं बावजूद इसके डॉक्टर लगातार दुष्कर्म की घटना से मना करते रहे। इसमें एक बड़ा ग्रुप काम कर रहा है जो मासूम बच्चियों के साथ गलत करते हैं और आवाज उठाने वाले की हत्या कर देते हैं। परिजनों ने हॉस्टल संचालक के साथ ही प्रभात मेमोरियल अस्पताल के संचालक डॉ सतीश की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने IMA समेत अन्य सक्षम प्राधिकार से उनका लाइसेंस रद्द करने की भी मांग की।
क्या है मामला
बीते 5 जनवरी को छात्रा घर से लौटी थी और 6 जनवरी को उसने अन्य छात्राओं के साथ खाना खा कर अपने कमरे में चली गई और फिर बाहर नहीं आई। अन्य छात्राओं और हॉस्टल वार्डन को जब कुछ शंका हुई तो कमरे का दरवाजा तोड़कर बेहोशी की हालत में उसे निकाला गया और अस्पताल पहुँचाया गया। छात्रा को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 5 दिनों तक इलाज चला लेकिन कोई सुधार नहीं होने पर परिजन उसे लेकर फिर मेदांता अस्पताल गए जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। 12 जनवरी को पोस्टमार्टम के बाद गांधी मैदान के समीप सड़क जाम कर हंगामा भी किया था। इस दौरान पुलिस ने उनके ऊपर लाठीचार्ज भी किया था। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई है।
पटना से चंदन तिवारी की रिपोर्ट
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