बेगूसराय: यह तो आप सबने सुनी होगी कि पहले शादियों में बारात बैलगाड़ी से जाती थी। अभी के हाईटेक तथा महंगी और लग्जरी जमाने में भी आपको अगर उस दौर का दृश्य देखने को मिल जाये तो आपका चौंकना निश्चित ही है। ऐसा ही कुछ हुआ बेगूसराय में जहां एक बारात ने स्थानीय लोगों समेत रास्ते भर में देखने वाले लोगों को हैरत में डाल दिया। दरअसल यह बारात की लग्जरी कार या आधुनिक तरीके से नहीं बल्कि वही पुराने ज़माने की तरह बैलगाड़ी से निकली थी। दूल्हा समेत सभी बाराती बैलगाड़ी पर सवार हो कर ही दुल्हन के घर पहुंचे।
मामला बेगूसराय के छौड़ाही प्रखंड के पुरपथार गांव का है जहां प्रिंस यादव की शादी थी। अब दूल्हा प्रिंस ने आधुनिक तरीके की जगह पुराने ज़माने की बैलगाड़ियों से शादी के लिए जाने की ठानी और फिर तैयारी भी शुरू कर दी गई। बारात के दिन 11 घोड़े, 20 बैलगाड़ियाँ आई और फिर उसी से बारात निकली। बैलगाड़ियों के साथ ही रिक्शों का भी लंबा काफिला था। बारात छौड़ाही से निकल कर समस्तीपुर के मंगालगढ़ गांव तक पहुंची। दोनों ही गांवों के साथ ही बारात जिस रास्ते से भी गुजरी लोग पुराने स्टाइल में निकली बारात की एक झलक अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करने को आतुर दिखे।
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आधुनिक जमाने में भी पुरानी परंपराओं को जीवंत करने की एक कोशिश में बैलगाड़ी से निकली बारात में जाने से स्थानीय विधायक भी अपने आप को नहीं रोक सके और वह दूल्हा के साथ बैलगाड़ी पर सवार हो गए। दूल्हा के साथ बैलगाड़ी पर सवार हो कर विधायक अभिषेक आनंद भी बारात गए। इस दौरान लोगों ने कहा कि 35-40 वर्षों पहले ऐसे ही बारात निकलती थी जो कि अब दुर्लभ है। अभी के समय में दूल्हा और परिवार के लोग बारात जाने के लिए किराये पर महंगी और लग्जरी गाड़ियों का इंतजाम करते हैं फिर बारात जाती है लेकिन इस बारात ने पुराने ज़माने की याद दिला दी साथ ही यह भी कि आज के युवा वर्ग भी उस जमाने को याद करने में पीछे नहीं हैं।
शादी में शरीक होने के बाद विधायक अभिषेक आनंद ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी बेहद प्रासंगिक हैं। विधायक ने दुल्हे के इस अनूठे पहल की काफी प्रशंसा की वहीं स्थानीय लोगों ने भी इस आयोजन को बेहद शानदार और यादगार बताया।