पटना: बिहार की सियासत में रविवार को अचानक घटनाओं की ऐसी कड़ी सामने आई, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। एक तरफ कांग्रेस के बागी विधायक सुरेंद्र कुशवाहा का जदयू नेता और मंत्री अशोक चौधरी के आवास पर पहुंचना, तो दूसरी तरफ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का प्रस्तावित इस्तीफा अचानक टल जाना—इन घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन उम्मीदवार एडी सिंह के लिए वोटिंग से दूरी बनाकर चर्चा में आए सुरेंद्र कुशवाहा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 16 मार्च को हुए चुनाव में वे वोट डालने नहीं पहुंचे थे, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अब उनका जदयू के वरिष्ठ नेता से मिलना सियासी संकेतों को और मजबूत कर रहा है। इस मुलाकात को लेकर कयास तेज हो गए हैं कि क्या महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
इसी बीच, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का बिहार विधानसभा से इस्तीफा देने का कार्यक्रम भी अंतिम समय में टल गया। जानकारी के अनुसार, उन्हें रविवार सुबह 9 बजे इस्तीफा देना था, लेकिन अचानक वे असम के डिब्रुगढ़ के लिए रवाना हो गए। इस बदलाव ने भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
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विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार भी अचानक दिल्ली रवाना हो गए हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी नेतृत्व से इस्तीफे को लेकर सूचना मिलने के बाद वे पटना आए थे, लेकिन किसी आपात स्थिति के कारण कार्यक्रम स्थगित हो गया। अब नई तारीख तय होने के बाद ही इस्तीफा दिया जाएगा। गौरतलब है कि नितिन नवीन हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं और राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उन्हें विधायक पद छोड़ना होगा। उनके इस्तीफे के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की संभावना बन रही है, जिस पर सभी प्रमुख दलों की नजरें टिकी हुई हैं। उधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। इसके लिए 30 मार्च अंतिम तारीख तय की गई है। लगातार हो रहे इन राजनीतिक घटनाक्रमों ने साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति आने वाले दिनों में और भी दिलचस्प मोड़ ले सकती है।