बिहार की राजनीति इन दिनों एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद अब राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता समीकरण और गठबंधन की राजनीति के बीच हर दिन नए नाम सामने आ रहे हैं, जिससे सियासी माहौल और भी गर्म होता जा रहा है। 89 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण मुख्यमंत्री पद पर उसकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। ऐसे में सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय जैसे बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, इसी बीच जदयू खेमे से एक नया और दिलचस्प नाम तेजी से उभरकर सामने आया है—निशांत कुमार।
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फुलवारीशरीफ के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने खुलकर निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि निशांत में एक सफल मुख्यमंत्री बनने के सभी जरूरी गुण मौजूद हैं और जदयू के कार्यकर्ता भी उन्हें इस भूमिका में देखना चाहते हैं। रजक ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला नीतीश कुमार और एनडीए के शीर्ष नेतृत्व द्वारा सामूहिक रूप से लिया जाएगा।
निशांत कुमार ने हाल ही में 8 मार्च को औपचारिक रूप से जदयू की सदस्यता ली है और इसके बाद से उनकी राजनीतिक सक्रियता तेजी से बढ़ी है। कई कार्यक्रमों और जनसंवाद के दौरान उनके समर्थन में नारेबाजी भी देखी गई है। पटना में पोस्टर लगाकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी उठ चुकी है। जदयू के कई नेता, जैसे नीरज कुमार, पहले ही “जय निशांत, तय निशांत” जैसे नारों के जरिए उनके समर्थन का संकेत दे चुके हैं।
हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर नहीं लगी है। लेकिन जिस तरह से निशांत कुमार का नाम तेजी से उभर रहा है, उसने बिहार की राजनीति में एक नया समीकरण जरूर खड़ा कर दिया है। अब सबकी नजरें एनडीए नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो राज्य की अगली सियासी दिशा तय करेगा।




