रायपुर: हत्या के करीब 23 साल एक पुराने मामले में कोर्ट ने एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूर्व सीएम के बेटे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट ने CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को बदल दिया और पूर्व सीएम के बेटे को उम्र कैद की सजा के साथ ही एक हजार रूपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना की राशि जमा नहीं करने के एवज में उन्हें 6 महिना अतिरिक्त जेल में रहना होगा।
मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का है जहां वर्ष 2003 में बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को मुख्य साजिशकर्ता करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द कुमार वर्मा की पीठ ने CBI की अपील पर निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। इस दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए निचली अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताया और कहा कि एक ही गवाही पर कुछ आरोपियों को सजा देना जबकि कथित मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर देना न्यायसंगत नहीं होगा।
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बता दें कि राम अवतार जग्गी हत्याकांड की सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने अमित जोगी को साक्ष्य के अभाव के आधार पर बरी कर दिया था जबकि अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इस मामले में 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था जिसमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह बाद में सरकारी गवाह बन गये थे जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया था वहीं कोर्ट ने अन्य 28 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। निचली अदालत के फैसले के बाद मृतक के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और न्याय की मांग की थी जिसे बाद में सुनवाई के लिए हाई कोर्ट भेज दिया गया था।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान CBI के वकील ने दलील दी कि हत्याकांड तत्कालीन राज्य सरकार के संरक्षण में की गई थी। जब CBI ने जांच शुरू की थी उस दौरान सता का लाभ उठाते हुए कई सबूत नष्ट भी कर दिए गए थे। ऐसे मामलों में सिर्फ भौतिक साक्ष्य की कमी के आधार पर आरोपियों को राहत देने के बदले षड्यंत्र के कड़ी को समझना आवश्यक है। बता दें कि मृतक राम अवतार जग्गी राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता थे और उनकी हत्या 4 जून 2003 को गोली मार कर दी गई थी।
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