अंशकालिक का कलंक मिटाओ! पूर्णकालिक की मांग पर गर्दनीबाग में शिक्षकों का हुंकार
पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक शिक्षक अपनी मांगों को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। हाथों में पोस्टर, जुबान पर नारे और आंखों में उम्मीद—इन शिक्षकों का एक ही संकल्प है: “शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक का सम्मान बढ़ाओ, अंशकालिक का कलंक मिटाओ।”
धरनास्थल पर मौजूद शिक्षक सरकार से अंशकालिक व्यवस्था समाप्त कर उन्हें पूर्णकालिक करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से वे विद्यालयों में बच्चों को शारीरिक शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें स्थायी और सम्मानजनक दर्जा नहीं मिला है। प्रदर्शनकारी शिक्षक “हमें पूर्णकालिक करिए” और “समान काम समान वेतन” जैसे नारे लगाते हुए सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं।
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हमारे संवाददाता मनीष कुमार से बातचीत के दौरान अनुदेशकों ने बताया कि उनका आंदोलन किसी शौक का परिणाम नहीं, बल्कि मजबूरी है। उनका कहना है, “शौक नहीं मजबूरी है, बच्चों के लिए पूर्णकालिक बहुत जरूरी है।” शिक्षकों का तर्क है कि जब वे अन्य शिक्षकों की तरह ही विद्यालयों में नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं, तो उन्हें भी समान वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
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धरना स्थल पर गूंज रहे नारों में “हर जोर-जुल्म के टक्कर में, पूर्णकालिक हमारा नारा है” प्रमुख रूप से सुनाई दे रहा है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार यदि वास्तव में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना चाहती है, तो सबसे पहले शारीरिक शिक्षा और स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना होगा। इसके लिए अनुदेशकों को स्थायी दर्जा देना अनिवार्य है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल उनके अधिकारों की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की भी है।