पटना: केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (महिला आरक्षण कानून) को लागू करने के मूड में दिखाई दे रही है और इसमें संशोधन से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई है। केंद्र सरकार की योजना है कि आगामी 2029 के संसदीय चुनाव से पहले देश में लोकसभा और विधानसभा में सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढाई जाये साथ ही सदनों में महिला की भागीदारी 33 प्रतिशत सुनिश्चित की जाये। हालांकि जनगणना के बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जायेगा जिसके बाद सीटों की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी लेकिन उससे पहले सरकार 2011 के जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण कानून लागू करने का मन बना रही है। अगर सर्वदलीय बैठक में सकारात्मक बातचीत हुई तो संभव है मौजूदा सत्र में ही संशोधन विधेयक सदन में पेश किया जा सकता है।
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बैठक के बाद पता चलेगा सरकार की मंशा
सरकार के इस कदम की पक्ष और विपक्ष दोनों ने स्वागत किया है लेकिन राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी और पाटलिपुत्र लोकसभा से सांसद मीसा भारती ने बड़ा बयान दिया है। मीसा भारती ने कहा कि सरकार की यह पहल बेहतर है लेकिन इसका राजनीतिक उपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार की क्या मंशा है लेकिन हमलोग उम्मीद करते हैं सर्वदलीय बैठक में सरकार की तरफ सारी बातें स्पष्ट रूप से रखी जाएगी। अगर सरकार सारी जानकारी स्पष्ट रुप से सभी दलों को देती है तो फिर इसमें कोई दिक्कत नहीं है। बैठक के बाद ही सरकार की मंशा और पारदर्शिता स्पष्ट हो पायेगी और हमारी पार्टी की तरफ से बैठक के बाद ही आधिकारिक बयान भी जारी किया जायेगा।
राजनीतिक लाभ न ले सरकार
पाटलिपुत्र की सांसद मीसा भारती ने कहा कि संभव है कि केंद्र की सरकार पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले महिला सशक्तिकरण की राजनीति करने की कोशिश कर रही हो लेकिन यह सब अब बैठक के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने बिहार की राजनीति को लेकर भी बातचीत की और कहा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर परिवारवाद की राजनीति को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं यह ख़ुशी की बात है। वह पहले परिवारवाद के विरुद्ध थे लेकिन अब जब उन्होंने अपने बेटे को राजनीति लाया है तो फिर उन्हें परिवारवाद पर बोलने से बचना चाहिए।
मीसा भारती ने कहा 'वह एडल्ट हैं'
इस दौरान राजद सांसद मीसा भारती ने जदयू सांसद गिरधारी लाल यादव पर बेटे के राजद से चुनाव लड़ने और पार्टी लाइन अलग हट कर काम करने की वजह से लोकसभा सदस्यता रद्द किये जाने की अनुशंसा पर कहा कि गिरधारी यादव जदयू से सांसद हैं और अब भी NDA में ही हैं। रही बात उनके बेटे के राजद से चुनाव लड़ने का मामला तो वह एडल्ट हैं और सोच समझ कर ही यह फैसला लिया होगा। ऐसे भी जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो अपने फैसले खुद लेने लगते हैं। एक घर में तीन लोग हैं तो संभव है कि तीनो अलग अलग उम्मीदवार को वोट करें ऐसे में चुनाव लड़ने की भी सबकी अपनी स्वतंत्रता है।
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