नई दिल्ली: संसद के सत्र में सोमवार को देश में नक्सलवाद पर चर्चा से एक दिन पहले ही गृह मंत्री ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने सदन में बताया कि देश में नक्सलवाद से मुक्ति के लिए सरकार ने क्या कदम उठाये हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में नक्सलवाद की जड़ विकास की कमी, गरीबी या अन्याय नहीं बल्कि एक विचारधारा है। केंद्र सरकार इस विचारधारा से प्रेइर्ट हिंसा को जड़ से खत्म करने के लिए सटीक कार्रवाई कर रही हिया। इसी कार्यकाल में भारत को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कर दिया जायेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भोले भले आदिवासियों को यह समझाया गया है कि उन्हें न्याय दिलाने और उनके अधिकार की खातिर यह लड़ाई लड़ी जा रही है। अन्याय होने पर हथियार उठाना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है, ऐसी गतिविधि मोदी सरकार के दौरान कभी स्वीकार्य नहीं होगी। शाह ने कहा कि बस्तर क्षेत्र के लोग सरकार की सुविधाओं से छूट गए थे क्योंकि वहां लाल आतंक की परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी हमला किया और कहा कि आजादी के 75 सालों में से 60 साल तक सत्ता कांग्रेस के हाथों में रही तो फिर आज तक आदिवासी समुदाय विकास से वंचित क्यों हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में असली विकास नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद हो रहा है जबकि कांग्रेस 60 वर्षों तक उन्हें घर या साफ पानी उपलब्ध नहीं करा सकी। उनके इलाकों में न स्कूल बने, न बैंकिंग सुविधाएं पहुंची न मोबाइल टावर लगे और न ही उनका किसी अन्य तरीके से विकास किया गया और अब जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। गृह मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि हमारी सरकार की नीति सिर्फ उन लोगों से बातचीत की है जो हथियार डाल देंगे। जो लोग गोलियों का इस्तेमाल करेंगे उन्हें जवाब में भी गोली ही दी जाएगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 5 जुलाई 2011 को नंदिनी सुंदर और अन्य ने याचिका दायर की थी जिसकी सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाया था कि नक्सलवादियों के खिलाफ राज्य की कार्रवाई गैरकानूनी थी। इसका परिणाम यह हुआ कि सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े लोगों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया और उनकी हत्या कर दी गई। बाद में सुदर्शन रेड्डी विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति उम्मीदवार बन गए।
गृह मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा की तुलना नक्सलियों से करने की कोशिश की गई जो पूरी तरह से अनुचित है। नक्सलियों ने रेड कॉरिडोर को इसलिए चुना था क्योंकि वहां शासन व्यवस्था की पहुंच कम थी। वामपंथी उग्रवादियों ने प्रभावित क्षेत्रों में विकास नहीं पहुँचने दिया लेकिन अब मोदी सरकार विकास घर घर तक पहुंचा रही है।
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