शिबू सोरेन को मिला पद्म विभूषण तो गदगद हैं बेटे हेमंत, केंद्र सरकार पर बरसे पूर्णिया सांसद
पटना: गणतंत्र दिवस के अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को केंद्र सरकार ने पद्म विभूषण की उपाधि से नवाजा है। शिबू सोरेन को पद्म विभूषण दिए जाने पर एक तरफ उनके बेटे एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने ख़ुशी जाहिर की। झारखंड के मुख्यमंत्री एवं शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार का आभार जताया वहीं पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने केंद्र की मोदी सरकार पर जम कर हमला किया और शिबू सोरेन को पद्म विभूषण से सम्मानित करने को आदिवासी के प्रति हीन भावना बताया।
आदिवासी के प्रति हीन भावना
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कहा कि यह केंद्र सरकार की आदिवासी समाज के प्रति हीन भावना का परिचायक है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी आदिवासी अस्मिता, अधिकार और पहचान के प्रतीक हैं। आजादी के बाद का सर्वोच्च आदिवासी नेता, संथाली संघर्ष संस्कृति अर्थात गुरूजी सम्मान के मोहताज नहीं हैं। केंद्र सरकार को उन्हें भारत रत्न सम्मान से सम्मानित करना चाहिए था। पद्म विभूषण की उपाधि से नवाजा जाना केंद्र सरकार की आदिवासी समाज के प्रति सोच को उजागर करता है।
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पद्म विभूषण पर्याप्त नहीं
इसके साथ ही झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा और शिबू सोरेन को भारत रत्न दिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि गुरु जी जैसे व्यक्तित्व के लिए पद्म विभूषण पर्याप्त नहीं है, उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए।
झारखंड के CM हेमंत सोरेन का सोशल मीडिया पोस्ट
भारत रत्न थे, हैं और रहेंगे
बता दें कि शिबू सोरेन को पद्म विभूषण दिए जाने पर सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रधानमंत्री और केंद्र की सरकार का आभार जताया और झारखंड वासियों को बधाई दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अपने पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को पद्म विभूषण दिए जाने पर केंद्र सरकार का आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने अपने पिता के लिए भारत रत्न की भी मांग की। हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि 'हम सबके प्रिय, सम्माननीय और आदरणीय बाबा स्व दिशाेम गुरुजी शिबू सोरेन जी को पद्म भूषण सम्मान से घोषणा के लिए, झारखंड की समस्त जनता की ओर से मै केंद्र सरकार को हार्दिक आभार और धन्यवाद देता हूं।
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स्व दिशोम गुरुजी का जीवन राजनीतिक सीमाओं से कहीं परे, अनंत तक जाता है। उनका संपूर्ण जीवन समता, समावेशी और सामाजिक न्याय, अस्मिता, आदिवासी पहचान, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण तथा शोषित-वंचित वर्गों के हक और अधिकारों के लिए किए गए विराट संघर्ष का साक्षी रहा है। यह वही संघर्ष था, जिसने दशकों की सामाजिक और राजनीतिक लड़ाई के बाद झारखंड को उसका अपना राज्य दिलाया और झारखंडवासियों को झारखंडी होने का गर्व। झारखंड की जनता के हृदय और विचारों में, और लद्दाख से केरल तक, राजस्थान से असम तक देश के आदिवासी समाज के बीच, भारत मां के सच्चे सपूत, स्व बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी भारत रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे।'