NEET छात्रा मौत मामले को ठंडा करने की कोशिश में है पुलिस? लालू की बेटी रोहिणी ने लगाया बड़ा आरोप...
पटना: राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की छात्रा के संदिग्ध मौत का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में सियासत तेज हो गई है और विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत राज्य सरकार और पुलिस पर हमलवार है। विपक्ष के नेता लगातार पूलिस पर मामले की लीपापोती का आरोप लगा रहे हैं और नीतीश सरकार पर अपराधियों को बचाने का भी गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
इस मामले को लेकर राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य भी अब सक्रिय दिख रही हैं और सोशल मीडिया के जरिये सरकार और पुलिस को घेरने की कोशिश कर रही हैं। रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य की सरकार और पुलिस पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने एक तरफ पुलिसिया जांच को महज दिखावा बताया तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी और उप मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री के बयान को घिसा पिटा बयान दे कर औपचारिकता बताते हुए बड़ा हमला किया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस पर मामले को लंबा खींच कर दिशा से भटकाने और ठंडा करने की कोशिश तक करार दे दिया।
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रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि 'दिशाहीन जाँच .. भटकाने की कोशिश !! बिहार के लोगों में ये आम धारणा कायम हो रही है कि "शम्भू गर्ल्स हॉस्टल कांड में अगर किसी ने पुलिसिया जाँच से कोई उम्मीद लगा रखी है , तो वो मुगालते में जी रहा है ".. ऐसी धारणा कायम होने की वाजिब वजहें भी हैं " घटना घटित हुए लगभग एक पखवारे का समय होने जा रहा है , उपलब्ध साक्ष्यों व् उजागर पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट से लगभग सब कुछ स्पष्ट है, फिर भी पुलिस के द्वारा पुलिसिया जाँच की आड़ में रोज एक नयी भटकाने, भ्रम पैदा करने वाली थ्योरी सामने रखी जा रही है.. हॉस्टल सचालकों , सहज सर्जरी नर्सिंग होम, प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल, प्रभात हॉस्पिटल के डॉक्टर सतीश , चित्रगुप्त नगर थाने की महिला पुलिस अधिकारी , पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक पर किसी भी प्रकार कोई पुख्ता कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है , मुख्य आरोपियों की अब तक नहीं हुई गिरफ़्तारी के सवाल पर भी सरकार के द्वारा गठित एसआईटी मौन है , बिहार के माननीय मुख्यमंत्री मौन हैं, गृह - मंत्री घिसा - पिटा जवाब दे कर औपचारिकता पूरी करते दिख रहे हैं ".. ऐसा प्रतीत होता है कि बिहार सरकार व् पुलिस जाँच की दिशा को लंबा खींच व् भटका कर मामले को ठंढा करने की कोशिश के साथ मामले की लीपापोती करने वाले आरोपियों एवं अभियुक्तों को किसी बड़े दबाब की वजह से बचाना चाह रही है.. !!

रोहिणी आचार्य के इस पोस्ट के बाद अब देखना है कि सत्ता पक्ष किस तरह से जवाब देता है वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को अपना हथियार बनाता है या नहीं। हालांकि आपको बता दें कि मामला सामने आने के बाद पहले तो पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया और फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद SIT गठित की जो कि अब बड़े दायरे में अपनी जांच कर रहा है। हालांकि SIT जांच शुरू होने के बावजूद अब तक इस मामले में कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिसे अब विपक्ष भुनाने की कोशिश में जुट गया है।
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