पटना: बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पेश किया और ध्वनिमत से वह पारित भी हो गया। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच हलकी कहा सुनी भी हुई। एक तरफ जहां नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सत्ता पक्ष पर कई तंज कसे तो सीएम सम्राट समेत दोनों उप मुख्यमंत्री ने जोरदार पलटवार भी किया। इस बीच विधानसभा चुनाव के बाद पारिवारिक कारणों से परिवार और राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा करने वाली राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी और सारण लोकसभा से उम्मीदवार रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से सीएम सम्राट चौधरी पर तीखे हमले किये।

रोहिणी आचार्य ने सदन में मुख्यमंत्री के भाषण जिसमें उन्होंने कहा था कि मुझे बिहार की 14 करोड़ जनता का आशीर्वाद प्राप्त है पर तंज कसते हुए रोहिणी ने व्यंग्य के अंदाज में सवाल किया कि क्या बिहार में 14 करोड़ मतदाता हैं या फिर सभी ने मतदान किया था कि उन्हें 14 करोड़ जनता का आशीर्वाद मिल गया। NDA ने वोट सम्राट चौधरी के नाम पर लड़ा था क्या कि उन्हें आशीर्वाद मिल गया। इसके साथ ही उन्होंने सम्राट के बयान जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार के द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री बनाये जाने की बात कही थी पर भी तंज कसा और कहा कि आप यह दंभ भरते हुए कह तो रहे हैं कि आपको सीएम उन्होंने बनाया लेकिन आप यह बताना भूल गए कि आपने ही नीतीश कुमार को हटाने के लिए मुरेठा बाँध कर प्रतिज्ञा भी ली थी और प्रतिज्ञा पूरी हुए बिना ही खोल भी लिया था। इसके साथ ही रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री के बयानों के कई हिस्सों पर सवाल खड़े किये।

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रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि 'मुख्यमंत्री फिर से विरोधाभासी बातें करते ही सदन में दिखे  सदन में विश्वास मत के प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट कुमार चौधरी उर्फ़ राकेश कुमार चौधरी उर्फ़ राकेश कुमार मौर्या उर्फ़ सम्राट कुमार मौर्या कहते दिखे कि उनको बिहार की 14 करोड़ जनता का आशीर्वाद प्राप्त है, किस यंत्र - थर्मामीटर की मदद से मुख्यमंत्री ने ये माप लिया? क्या कुल आबादी के सभी 14 करोड़ लोगों ने वोट किया था? क्या बिहार में 14 करोड़ मतदाता हैं? क्या एनडीए ने चुनाव सम्राट चौधरी के नाम व  चेहरे पर लड़ा था? जरूर मुख्यमंत्री जी की यादाश्त के साथ कोई केमिकल लोचा है!

रोहिणी ने लिखा कि अपने संबोधन में मुख्यमंत्री अपनी उम्र, अपनी डिग्री के बारे में तो बात करते दिखे, पहली बार एफिडेविट भी किसी तरह से सही बोलते देखे - सुने गए, मगर अपनी उम्र, अपनी डिग्री को सही साबित करने, सत्यापित करने के पक्ष में कोई तार्किक - तथ्यपरक बात कहने से बचते दिखे। लालू जी के द्वारा जेल भेजे जाने की बचकानी बात कहते हुए प्रपंच के सहारे मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल करने वाले सम्राट चौधरी ये भूल गए भाजपा के ही लोग कहते हैं कि कानूनी व न्यायिक प्रक्रिया विधि - विधान के अनुरूप चलती है, किसी के इशारे पर नहीं। अगर इशारे पर चलती है तो फिर हम लोगों की ये बात साबित होती है कि लालू जी व उनके परिवार को भी किसी के इशारे पर ही फंसाया गया है।

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मुख्यमंत्री अपने संबोधन में ये दंभ भरते तो दिखे कि उन्होंने  नीतीश कुमार जी को मुख्यमंत्री बनाने में महती भूमिका निभायी .. मगर ये बताना भूल गए कि उन्होंने ही नीतीश कुमार जी को हटाने के लिए मुरेठा बांध कर प्रतिज्ञा ली थी , मगर बिना प्रतिज्ञा पूरी हुए मुरेठा खोल भी लिया था। मुख्यमंत्री  अपने संबोधन में खुद पर हो रहे पर्सनल अटैक पर तिलमिलाते दिखे, मगर ये भूल गए कि कैसे उन्होंने एक बेटी के द्वारा अपने पिता को किडनी दिए जाने पर बेहद ही ओछी टिप्पणी की थी। मुख्यमंत्री को शायद ये भी भान नहीं है कि राजनीतिक - सार्वजनिक जीवन में पर्सनल जैसा कुछ विशेष नहीं होता, सब कुछ पब्लिक के स्कैनर पर होता है और दाखिल हलफनामे के माध्यम से पब्लिक डोमेन में भी होता है, जहाँ गड़बड़ी होती है वहाँ सवाल उठता है और सवाल उठना - उठाना लाजिमी भी है। 

मुख्यमंत्री के द्वारा दाखिल हलफनामों से ही सवाल खड़े हुए हैं, मुख्यमंत्री के द्वारा दाखिल हलफनामे ही विरोधाभासी हैं, ऐसी कई विसंगतियां हैं हलफनामों में, जिनका यथोचित जवाब मुख्यमंत्री अभी तक नहीं दे सके हैं। मुख्यमंत्री कहते दिखे "सत्ता किसी की बपौती नहीं होती" ऐसा कह मुख्यमंत्री कोई नयी बात नहीं कर रहे, ये जगजाहिर है जनता जिसे चुन कर भेजती है, वही सत्ता में काबिज होता है, मगर वर्त्तमान मुख्यमंत्री को तो जनता ने चुना ही नहीं।  मुख्यमंत्री ये भूल गए कि वो मुख्यमंत्री का चेहरा तो थे नहीं, चेहरा तो कोई और था, जिसे साजिश के साथ बेबस - लाचार कर हटा दिया गया और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैक - डोर से आ कर कब्ज़ा जमा लिया वर्तमान मुख्यमंत्री ने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि "वो किसी की पाठशाला से नहीं हैं", बिल्कुल ठीक कहा। मुख्यमंत्री ने घाट - घाट घूम - घूम कर अवसरवादिता की राजनीति की पढाई की है। किसी एक पाठशाला में टिके ही नहीं, अभी जिस पाठशाला में हैं, वहाँ कितने दिन टिकेंगे इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। अपनी कुर्सी बचाने के लिए नीतीश कुमार जी की चापलूसी में मुख्यमंत्री ये कह गए कि लालू जी को नीतीश जी ने मुख्यमंत्री बनाया। क्या लालू जी को जनता ने अपना वोट नहीं दिया था? क्या सारा वोट नीतीश कुमार जी ने ही दे दिया था? लालू जी के साथ सदैव अपार जनसमर्थन रहा और ये जगजाहिर है कि लालू जी जैसे बड़े और मजबूत जनाधार वाला जननेता न हुआ न भविष्य में होगा। लालू जी की ऊंचाई तो खुद मुख्यमंत्री अपने उस वायरल वीडियो में स्वीकारते दिखे हैं, जिसमें वो कह रहे हैं कि वो लालू जी को गाली दे - दे कर ही नेता बने, जहाँ आज हैं वहाँ तक पहुँचे हैं। खुद को खुद ही गालीबाज बताने - साबित करने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री हैं जनाब।

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