सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं को लेकर दिया है बड़ा Verdict !

समाज बदल रहा है, लेकिन कानून कई बार पीछे छूट जाते हैं। ऐसे में न्यायपालिका का दायित्व और भी बढ़ जाता है—और इस बार सुप्रीम कोर्ट ने वही किया है, जो लंबे समय से जरूरी था। दत्तक संतान को लेकर मातृत्व अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला न सिर्फ कानूनी सुधार है, बल्कि सामाजिक सोच को भी नई दिशा देता है। अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलेगा। यह फैसला उन हजारों महिलाओं के लिए राहत लेकर आया है, जो अब तक एक तकनीकी सीमा के कारण इस अधिकार से वंचित थीं।

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अब तक का नियम यह था कि केवल तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही मातृत्व लाभ मिलता था। यानी यदि कोई महिला बड़े बच्चे को अपनाती थी, तो उसे इस महत्वपूर्ण अवकाश का हक नहीं मिलता था। सुप्रीम कोर्ट ने इस भेदभावपूर्ण प्रावधान को खत्म करते हुए स्पष्ट किया कि मातृत्व केवल जैविक संबंध से नहीं, बल्कि देखभाल और भावनात्मक जुड़ाव से तय होता है।

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यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि गोद लिए गए बच्चों को भी उतनी ही देखभाल, समय और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है, जितनी जैविक बच्चों को। ऐसे में मां को शुरुआती समय देना जरूरी है, ताकि वह बच्चे के साथ मजबूत रिश्ता बना सके। कोर्ट ने सरकार को पितृत्व अवकाश पर भी विचार करने की सलाह दी है, जो एक प्रगतिशील कदम माना जा सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि अब पालन-पोषण की जिम्मेदारी को केवल मां तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। कुल मिलाकर, यह निर्णय समानता, संवेदनशीलता और आधुनिक पारिवारिक मूल्यों की दिशा में एक बड़ा कदम है—जो आने वाले समय में समाज को और अधिक समावेशी बना सकता है।


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