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विपक्ष ने लॉ एंड ऑर्डर के सवाल पर किया सदन का बहिष्कार, मंत्री ने कहा 'विपक्ष हमारे साथ...

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पटना: सोमवार को बिहार विधानसभा का बजट सत्र काफी हंगामेदार रहा। सोमवार को बजट सत्र पर प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने सदन का बायकॉट किया और बाहर निकल गया। इसके बाद विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि बजट पर प्रश्नकाल के दौरान सरकार सभी बातों का जवाब दे रही थी लेकिन राज्य में कानून व्यवस्था पर एक शब्द भी नहीं कहा जा रहा था। इसी पर जब विपक्ष ने सवाल किया लेकिन सरकार ने एक शब्द भी जवाब नहीं दिया। लगातार बताया जाता रहा कि बिहार में शासन और सुशासन है और बिहार में लॉ एंड ऑर्डर काफी अच्छा है।

आलोक मेहता ने कहा कि आपलोग भी जानते हैं कि बिहार लगातार घटनाएं घट रही है। नीट छात्रा मामले में भी सरकार या पुलिस अब तक कुछ नहीं कर सकी है और ऐसा लगता है कि वह मामला प्राथमिकता है ही नहीं। ऐसा क्या काम है कि बिहार की पुलिस नहीं कर पायेगी और CBI कर लेगी लेकिन अब तक बिहार सरकार ने जितनी भी केस CBI को हैण्ड ओवर किया है किसी में जांच नहीं हुई है। खबरों को छुपाया जा रहा है, लगातार आपराधिक घटनाएं घट रही है। विभिन्न जिलों में आपराधिक घटनाएं हो रही है और सरकार इन मामलों में संज्ञान लेने के लिए तैयार नहीं है। ऐसा लगता है कि सरकार अक्षम है, और इसके पास अख़लाक़ नहीं है कि जनसमस्याओं का मुकाबला कर सके। अब ऐसा लगने लगा है कि अब बिहार में सरकार और अपराधी मिल चुके हैं और यही वजह है कि हमलोगों ने सदन से वाकआउट किया है।

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आलोक मेहता ने कहा कि इन दिनों सरकार में अलोकतांत्रिक काम हो रहा है। सदन के दौरान किसी भी नेता का माइक बंद करने पर कार्रवाई होना चाहिए। सदन की गरिमा बहाल होनी चाहिए और हर सदस्य को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत बोलने का मौका दिया जाना चाहिए। सरकार विभिन्न स्तर पर अपनी जिम्मेवारी से भाग रही है। बिहार में कानून व्यवस्था ध्वस्त है फिर भी जंगलराज का याद दिलाया जाता है। वह दौर तो सामाजिक परिवर्तन का दौर था, आपराधिक घटनाएं नहीं होती थी। आज तो एक एक दिन में दस-दस घटनाएं हो रही हैं। हम सरकार की भर्त्सना करते हैं और विरोध में वाकआउट किया है और आगे भी विरोध करते रहेंगे। अपराधियों के मन से सरकार का डर निकल गया है। अगर घटना के बाद आप अपराधी को गिरफ्तार करते हैं तो कोई बड़ी बात नहीं है, बल्कि कोशिश होनी चाहिए कि घटनाएं रोकी जाये।

आलोक मेहता ने 2005 से पहले के समय को जंगलराज कहे जाने पर कहा कि वह जंगलराज नहीं था बल्कि समाज में सामाजिक और आर्थिक विषमता को दूर करने और सामाजिक बदलाव का दौर था। लालू यादव के सत्ता में आने के बाद परिवर्तन का दौर शुरू हुआ और समाज में कई बदलाव हुए। उस वक्त बिहार में आपराधिक घटनाएं नहीं होती थी। जब कोई क्रांति होती है तो थोड़ी अशांति होती है इसलिए ये लोग उस दौर को जंगलराज कहते हैं। लेकिन असली जंगलराज आज है जहां बेख़ौफ़ हो कर अपराधी लगातार घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और कार्रवाई कुछ नहीं हो रही है। ये लोग कहते हैं कि हम न किसी को बचाते हैं और न किसी को फंसाते हैं लेकिन सच्चाई है कि ये लोग अपराधियों को लगातार बचाने में लगे हुए हैं।

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वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के सदन से बायकॉट के सवाल पर बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि इन लोगों ने पूरा भाषण सुन लिया और अंतिम 5 मिनट में सदन से बाहर निकल गये। बायकॉट भी दो तरह का होता है, एक होता है कि आप गुस्से में बाहर जाते हैं और दूसरा होता है कि मुस्कुराते हुए। ये लोग पूरा भाषण सुनने के बाद मुस्कुराते हुए सदन से बाहर निकले हैं और हमलोगों को जता रहे हैं कि हमलोग 90 प्रतिशत सरकार के साथ हैं लेकिन 10 प्रतिशत में मीडिया को दिखाने और मशाला देने के लिए भी काम करना पड़ता है। इन लोगों का बायकॉट कोई विरोध नहीं बल्कि मीडिया को मशाला देना था। इस दौरान दिलीप जायसवाल ने विधान परिषद में सीएम नीतीश और नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के बीच नोंक झोंक को लेकर कहा कि दोनों के बीच इस तरह का नोक झोंक चलता रहता है और यही रिश्ता है। रिश्ते में जब तक नोंक झोंक न हो तो मजा नहीं आता है।

वहीं सीएम नीतीश के खास और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि लोगों का अपना तरीका होता है। सबको अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है। आपलोग भी तैयार हो कर आइये, सरकार भी जवाब तैयार कर आती है। जनता सब देख रही है, क्योंकि जनता ही मालिक है। लोकतंत्र में कोई हार गया और कोई जीत गया तो इसका यह मतलब नहीं है कि सब उसी का अधिकार हो गया। जतना आपके ऊपर भरोसा और निष्ठा दिखाती है। सभापति ने जब सब बात कह दी उसके बावजूद ये लोग ऐसा कर रहे हैं। ये लोग जनता के सामने तो पिट चुके हैं तो अब कुछ से कुछ कर रहे हैं। नीट छात्रा का मामला काफी उलझ गया था इसलिए CBI को दिया गया है। बिहार में आपराधिक मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाती है। ये लोग कहते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा नहीं है, जो खुद के बहू बेटे को सुरक्षित नहीं रख सके वे लोग प्रोटेस्ट कर रहे हैं। ये लोग वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं, अगर साक्ष्य है तो कोर्ट जाएँ न, यहां हल्ला करने से क्या मिलेगा

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