बिहार की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में गुरुवार को अहम हलचल देखने को मिली। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के 18वें दिन सरकार छह महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करने की तैयारी में है। सामान्य चर्चा के बाद इन प्रस्तावों पर सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है। भोजनावकाश के बाद इन्हें सदन के पटल पर रखा जाएगा।
प्रस्तावित विधेयकों में बिहार जनविश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, बिहार अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड (संशोधन) विधेयक, बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) विधेयक, बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं विधेयक और बिहार सचिवालय सेवा (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन कानूनों से प्रशासनिक पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, अधिवक्ताओं के हितों की सुरक्षा, निजी संस्थानों की फीस पर नियंत्रण और माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं की निगरानी को मजबूती मिलेगी।
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इसी दिन वित्त विभाग के प्रभारी मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की लेखापरीक्षा रिपोर्ट भी सदन में पेश करेंगे, जिसे राज्य के वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उधर, विधानसभा परिसर में विपक्ष ने बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार और शराबबंदी को लेकर सरकार को घेरा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायकों ने भूमिहीन दलित परिवारों को तीन डिसमिल जमीन देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी का कहना है कि यह सम्मानजनक जीवन का सवाल है और सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
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राजद नेताओं ने गृह मंत्री Amit Shah के सीमांचल दौरे पर भी सवाल उठाए। साथ ही शराबबंदी को विफल बताते हुए अवैध शराब आपूर्ति के आरोप लगाए। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।