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सड़क से संसद तक संग्राम! पप्पू यादव की गिरफ्तारी और NEET छात्रा मौत पर कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन

पटना से दिल्ली तक सियासी उबाल—पप्पू यादव की गिरफ्तारी और NEET छात्रा की मौत को लेकर कांग्रेस का सड़क से संसद तक विरोध, जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन की तैयारी।

Big protest of Congress
सड़क से संसद तक संग्राम! पप्पू यादव की गिरफ्तारी और NEET छात्रा मौत पर कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन- फोटो : Darsh NEWS

पटना की सड़कों से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक NEET छात्रा की मौत और सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इन दोनों मामलों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिहार की राजधानी पटना में जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में ‘पप्पू यादव को रिहा करो’ के पोस्टर लिए कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पोस्टर जलाकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने NEET छात्रा के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब तक पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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इधर, पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े NEET छात्रा मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी है। सांसद पप्पू यादव के समर्थक दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा धरना-प्रदर्शन करेंगे, जहां 5 से 10 हजार लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। इस आंदोलन में दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले बिहारी समुदाय के लोग और अन्य समर्थक भी शामिल होंगे। खास बात यह है कि छात्रा के माता-पिता भी प्रदर्शन में मौजूद रहेंगे।

पीड़िता की मां ने कहा कि पप्पू यादव भले ही प्रदर्शन में शामिल न हो पाएं, लेकिन उन्हें भरोसा है कि बेटी को न्याय मिलेगा। उन्होंने SIT की जांच पर असंतोष जताते हुए कहा कि मामला CBI को सौंपा गया है। पप्पू यादव के समर्थन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी खुलकर सामने आए हैं। तेजस्वी ने कहा कि देश में तानाशाही जैसा माहौल है, जहां दोषियों को बचाया और निर्दोषों को फंसाया जा रहा है। NEET छात्रा मामले को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

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गौरतलब है कि पप्पू यादव इस प्रकरण को लेकर लगातार सरकार को घेर रहे थे और दिल्ली में बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही उन्हें 31 साल पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। प्रदर्शन के बाद संघर्ष समिति प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर चार प्रमुख मांगें रखेगी, जिनमें न्यायिक निगरानी में जांच, संदिग्धों से पूछताछ, सबूत नष्ट करने वालों पर कार्रवाई और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कदम शामिल हैं। यह आंदोलन अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है।


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