जहानाबाद में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ हुई गंभीर घटना को लेकर जिले में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से मौन जुलूस निकालकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। यह जुलूस ईदगाह मैदान से शुरू होकर पंचमहला, कच्ची मस्जिद, अस्पताल मोड़ होते हुए कारगिल चौक तक पहुंचा। रास्ते भर लोगों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग लिखी हुई थी।
जुलूस का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद रिज़वान ने कहा कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होना बेहद चिंता का विषय है। उनका आरोप था कि सरकार और पुलिस की निष्क्रियता से यह संदेश जा रहा है कि अपराधियों को परोक्ष रूप से संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक छात्रा का नहीं, बल्कि पूरे समाज की बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा है।
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प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आज अभिभावक अपनी बेटियों को बेहतर भविष्य के लिए शहरों में पढ़ने भेजते हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं उनके मन में डर पैदा कर रही हैं। अगर समय रहते दोषियों को सजा नहीं मिली, तो अपराधियों का हौसला और बढ़ेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है। मौन जुलूस के दौरान “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” जैसे सरकारी नारों पर भी सवाल उठाए गए। लोगों ने कहा कि नारे तभी सार्थक होंगे जब जमीनी स्तर पर बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष जताया गया।
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जुलूस के समापन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हमारी व्यवस्था वास्तव में बेटियों को सुरक्षित माहौल देने में सक्षम है, या फिर बदलाव केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है।