नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष की सभी पार्टियों की बुरी हार के बाद निराशा है। एक तरफ हार के सदमा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव चुनाव बाद से ही जनता के सामने नहीं आ रहे हैं तो दूसरी तरफ जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। चुनाव में जनता ने तो प्रशांत किशोर की पार्टी को जीरो पर आउट कर ही दिया अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने PK की पार्टी की याचिका को सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि अगर आपको जनता ने नकार दिया तो आप लोकप्रियता पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आ गए। आपको अगर न्यायिक प्लेटफार्म पर जाना ही है तो हाई कोर्ट जा सकते हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आप एक ही याचिका में पूरा विधानसभा चुनाव रद्द करवाना चाहते हैं जिसकी योग्यता ही नहीं है।
कोर्ट ने लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकान्त और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने प्रशांत किशोर की पार्टी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आप चाहें तो हाई कोर्ट जा सकते हैं। नीतीश सरकार ने चुनाव के दौरान जो राशि महिलाओं को दी है वह सहायता राशि है, इसलिए पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग करना सही नहीं है। चुनाव में जनता ने आपको नकार दिया तो आप लोकप्रियता पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में चले आये और एक ही याचिका में पूरा चुनाव रद्द करने की मांग कर डाली जो सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज की याचिका रद्द करते हुए सुनवाई से इंकार दिया। सुप्रीम कोर्ट के सख्त लहजे को देखते हुए पार्टी ने अपनी अर्जी वापस ले ली।
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क्या थी याचिका
बता दें कि जन सुराज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव के दौरान महिलाओं को 10-10 हजार रूपये ट्रांसफर किये जाने के NDA सरकार के फैसले को गैरकानूनी और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया गया है। प्रशांत किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में अब इस आधार पर बिहार चुनाव रद्द का दुबारा चुनाव करवाए जाने की मांग की थी। जन सुराज ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम सेक्शन 123 के तहत चुनाव आयोग को धारा 324 से प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाये। बिहार सरकार ने मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट लागू होने के बाद 6 अक्टूबर 2025 को और उसके बाद भी सत्ता की शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है। सरकार ने फ्री एंड फेयर इलेक्शन के सिद्धांतों के खिलाफ जाते हुए मतदाताओं के खाते में पैसे भेज कर लाभ पहुँचाया। चुनाव आयोग ने इसे लेकर कोई कार्रवाई नहीं की।
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