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जहां नृत्य बनती है साधना, विश्व शांति के संदेश से गूंजी बुद्ध नगरी

जहां नृत्य बनती है साधना, बोधगया में 15 साल पुरानी मुखौटा परंपरा। बुरी आत्माओं से मुक्ति के लिए गया में बौद्ध भिक्षुओं का पारंपरिक मुखौटा नृत्य। बोधगया में मुखौटा नृत्य की साधना, विश्व शांति के संदेश से गूंजी बुद्ध नगरी

Where dance becomes a spiritual practice.
जहां नृत्य बनती है साधना, विश्व शांति के संदेश से गूंजी बुद्ध नगरी- फोटो : Darsh News

पटना: बिहार की धरती यानि भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति की धरती के नाम से विश्वविख्यात। कहा जाता है कि बिहार शब्द का अर्थ ही बौद्ध धर्म का विश्रामालय (आराम करने या शांति पाने का स्थान) है। इसी पावन भूमि से मानव मुक्ति की असीम साधना शुरु होती है। और इस परंपरा को याद रखने के लिए प्रदेश के गया जिले के बोधगया स्थित भूटान मोनास्ट्री में विश्व शांति के लिए तीन दिवसीय पारंपरिक मुखौटा नृत्य महोत्सव का 11 जनवरी को भव्य शुभारंभ किया गया, और 13 जनवरी को समापन किया गया। इस महोत्सव की जानकारी देते हुए बोधगया टेंपल कमिटी के सचिव दोरजी, वंगडेल ने बताया कि हम बौद्ध भिक्षुओं के लिए बिहार हमारा सांस्कृतिक आवास है। उन्होंने कहा कि यह बिहारवासियों का हमारे धर्म के प्रति प्रेम और स्नेह है। जो हमारे सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेकर इससे सदा के लिए अमर बनाते है। इस महोत्सव को लामा साधु आधी रात 2 बजे भगवान बुद्ध की पूजा-अर्चना करके शुरू करते है। पूजा के समाप्त होते ही साधना व सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रम की शुरूआत की जाती है। 

15 वर्षों से हो रहा आयोजन 

इस महोत्सव के बारे में विस्तार से बताते हुए सचिव दोरजी कहते हैं कि भूटान से आए बौद्ध भिक्षु और लामा रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजकर मुखौटा नृत्य प्रस्तुत करते हैं। ढोल, नगाड़े और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों पर लामा आकर्षक नृत्य करते नजर आते हैं, जिससे समूची बुद्ध नगरी में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। इस महोत्सव को देखने आए आगंतुकों के मन-मन में विश्व शांति का संदेश पहुंचाया जाता है। मोनेस्ट्री प्रभारी दोरजे ने बताया कि यह आयोजन पिछले 15 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म में भी भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों की मान्यता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मुखौटा नृत्य करने वाले सभी लामा शांतिदूत होते हैं और उनके नृत्य से आसपास की बुरी आत्माओं और नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती हैं, जिससे क्षेत्र में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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अमेरिका, भूटान, वियतनाम, तिब्बत से पहुंचे श्रद्धालु 

मुखौटा नृत्य की ख्याति देश-विदेश में फैली है। यही वजह है कि बोधगया की धरती पर इस पारंपरिक नृत्य महोत्सव को देखने के लिए अमेरिका, भूटान, वियतनाम, तिब्बत समेत कई देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक बोधगया पहुंचे हैं। सभी ने बिहार के पारंपरिक विशेषताओं व समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों और रीतियों को जानकर इसकी खूब प्रशंसा की। कभी बिहार संस्कृति और शिक्षा के लिए विश्व गुरु माना जाता था। वक्त के साथ बिहार की छवि धूमिल होती चली गई। मगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की सत्ता संभालते ही बिहार के स्वर्णिम इतिहास को फिर से पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहे हैं। बिहार के विभिन्न पर्यटन स्थलों को चिन्हित कर उन्हें पर्यटकों के लिए विकसित किया जा रहा है। और यही कारण है कि अब देश-विदेश से पर्यटक यहां आकर समृद्ध बिहार के आकर्षण के मोह पाश में बंध जाते हैं।

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