पटना: बिहार में विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कवायद में जुटा हुआ है। इसी कड़ी में पिछले कुछ दिनों से विपक्ष राज्य सरकार को एक IAS पदाधिकारी के चार्टर्ड प्लेन से चलने की बात पर घेरने की कोशिश में जुटा हुआ है। इस मामले में विधानसभा में जब पहली बार सवाल उठे तो सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया जिसके बाद सोमवार को भी विपक्ष ने जम कर हंगामा किया। इस मामले में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खास और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने एक तरफ IAS का बचाव किया तो दूसरी तरफ उन्होंने जाति कार्ड भी खेली और विपक्ष पर सवाल उठाये।
मीडिया से बात करते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि जिस IAS निलेश देवरे के चार्टर्ड प्लेन से चलने की बात कही जा रही है दरअसल वह विमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए बिहार आ रही थी। उस प्लेन में मुख्यमंत्री के साथ मैं भी मौजूद था और हमलोगों को दिल्ली जाना था। उस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिल्ली में दो कार्यक्रम थे एक बिहार निवास का था और दूसरा जदयू के सांसद के सरकारी आवास पर कुछ कार्यक्रम था। हमलोगों के जाने के लिए वह विमान दिल्ली से पटना खाली ही आ रही थी तो वे उस विमान से अपने परिवार के साथ आ गए। वह नागरिक विमानन विभाग के अधिकारी भी हैं और खाली आ रहे विमान से अगर आ गए तो इसमें क्या गुनाह है। ये लोग उनके ऊपर आरोप बस इसलिए लगा रहे हैं कि वे OBC समुदाय से हैं। इनलोगों से मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को विमान से चलने की आजादी नहीं है क्या?
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इस दौरान मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि ये तो उन्हें बताना चाहिए कि वे निलेश देवरे को क्यों टारगेट कर रहे हैं। आखिर वे इन्हें टारगेट कर किसे बचाना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दे की बात यह है कि निलेश देवरे जब स्वास्थ्य विभाग में आये तो उन्होंने गड़बड़ी करने वाले 20-25 लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। ये सभी लोग सवाल उठाने वाले के करीबी हैं इसलिए उनके ऊपर इस तरह के आरोप लगाये जा रहे हैं। इस दौरान मंत्री अशोक चौधरी ने UGC लागू किये जाने के सवाल पर कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मना किया है, सरकार की तो इक्षा है ही। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में देख रहा है। वहीं उन्होंने सवर्ण को दलितों की तरह आरक्षण दिए जाने के सवाल पर कहा कि बाबा साहेब ने छुआछुत के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की थी न कि आर्थिक और सामाजिक आधार पर।
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