पूर्वी चंपारण: पूर्वी चंपारण में जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों पर अब राज्य की राजनीति काफी तेज हो गई है। सोमवार को विपक्षी पार्टी राजद का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्वी चंपारण पहुंचा जिसने घटना में मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान नेताओं ने मृतक के परिजनों को ढाढस बंधाते हुए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया तो दूसरी तरफ सरकार पर भी जम कर बरसे। राजद नेताओं ने राज्य में लागू शराबबंदी कानून को विफल बताया साथ ही जहरीली शराब से होने वाली मौतों को सरकार की गलत नीति करार दी।
मीडिया से बात करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी ने कहा कि शराबबंदी के दास वर्ष पूरे हो चुके हैं लेकिन इसके दुष्परिणाम भी काफी सामने आ रहा है। दो पीढियां समाप्त हो गई है लेकिन अब भी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहा बल्कि और भी बिगड़ ही रहा है। पहले जहां स्मैक और इंजेक्शन का नशा लोग सिर्फ सुनते थे वह आज हर चौक चौराहे पर मिलने लगा है। अब तो गांव भी इस नशा से अछूता नहीं है। यह सब प्रशासन की विफलता और गलत नीतियों का नतीजा है।
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मीडिया से बात करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद अब तक गरीब तबके के 300 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 10 लाख से अधिक मुकदमे दर्ज किये गए वहीं 16 लाख से अधिक लोग जेल जा चुके हैं। इस बार भी जहरीली शराब से मरने वालों में अधिकतम लोग गरीब तबके के हैं। कोई ठेला चलाता है तो कोई किसान है या कोई मजदूरी कर परिवार चला रहा था।
इसके साथ ही पूर्व विधान सभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने सरकार पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि इतना समय बीत जाने के बावजूद अब तक राज्य की सरकार ने मुआवजे की घोषणा नहीं की है। सरकारी अस्पतालों की हालत यह है कि वे सिर्फ मरीजों को रेफर करना जानते हैं। कई लोग निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैं लेकिन उनके पास पैसे नहीं हैं। उन्होंने एक व्यक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि एक व्यक्ति वेंटिलेटर पर था जिसकी मौत हो गई। उसके परिजनों के पास बिल चुकाने का उसके पास पैसा नहीं था मज़बूरी में परिवार ने शव को अस्पताल में ही छोड़ दिया। यह बेहद मर्माहत करने वाली स्थिति है और ऐसी स्थिति में प्रशासन को उचित कदम उठाना चाहिए।
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पूर्वी चंपारण से प्रशांत कुमार की रिपोर्ट





