पटना: बड़ी खबर राजधानी पटना से है जहां बहुचर्चित नीट गर्ल छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में गिरफ्तार हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को कोर्ट ने जमानत दे दी है। मनीष रंजन उस शंभू गर्ल्स हॉस्टल का मालिक है जिसमें नीट छात्रा बेहोशी की हालत में पाई गई थी और फिर इलाज के दौरान उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस मामले में CBI जांच कर रही है और कोर्ट में चार्जशीट दायर नहीं किये जाने के कारण अब कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है।
मनीष रंजन के वकील ने अदालत में भारतीय नगरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187(2) का हवाला देते हुए डिफ़ॉल्ट बेल की मांग की थी। वकीलों ने दलील दी थी कि आरोपी 90 दिनों से जेल में बंद है और पुलिस अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी है इसलिए उन्हें रिहा किया जाना चाहिए। वहीं विशेष लोक अभियोजक सुरेश चंद्र प्रसाद और पीड़िता के वकील एसके पांडेय ने इस गणित को चुनौती दी। लेकिन सुनवाई के दौरान CBI कोर्ट के जज ने आरोपी मनीष रंजन को इसलिए जमानत दे दी कि घटना के बाद से पुलिस, SIT और CBI की लगातार जांच के बावजूद अब तक चार्जशीट कोर्ट में दाखिल नहीं किया गया।
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बता दें कि आरोपी मनीष रंजन पर हॉस्टल के मालिक होने के नाते लापरवाही बरतने, मामले का मास्टरमाइंड होने तथा साक्ष्य मिटाने के आरोप लगे हैं। पुलिस ने उन्हें इस महीने 14 जनवरी को गिरफ्तार किया था जिसके बाद से वह लगातार जेल में बंद थे। इस मामले में उन्होंने और उनके वकील ने कोर्ट में कई बार जमानत की याचिका दायर की लेकिन हर बार कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया। अब पुलिस और CBI की लापरवाही और चार्जशीट दाखिल नहीं किये जाने की वजह से मनीष रंजन को जमानत मिल गई है। कोर्ट ने गिरफ्तारी के 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं किये जाने के आधार पर उन्हें जमानत दी है। बता दें इससे पहले भी सुनवाई के दौरान पटना पुलिस, SIT और CBI ने कोर्ट के द्वारा मनीष रंजन की जरूरत पूछे जाने पर मना कर दिया था और कहा था कि उन्हें उसकी कोई जरूरत नहीं है।
बता दें कि बीते जनवरी महीने में राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की एक छात्रा संदिग्ध हालत में बेहोश मिली थी जिसके बाद उसे विभिन्न अस्पतालों में ले जाया गया। उस दौरान एक तरफ जहां परिजनों ने सामूहिक रूप से दरिंदगी का आरोप लगाया था तो दूसरी तरफ हॉस्टल प्रबंधन और अस्पताल के डॉक्टरों ने नींद की दवा का ओवरडोज़ बताया था। हालांकि छात्रा की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दरिंदगी की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
परिजनों ने शुरुआती दौर में पटना पुलिस पर जांच में लापरवाही का आरोप लगाया जिसके बाद मामले में SIT गठित की गई। परिजनों ने SIT पर भी जांच की दिशा भटकाने और आरोपियों के दबाव में उन्हें बचाने का आरोप लगाया और उसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने CBI जांच की अनुशंसा की। अब CBI इस मामले की जांच कर रही है। कई बार आरोपियों और परिजनों से भी पूछताछ की गई लेकिन अब तक पुलिस या CBI कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी है।
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